आर्थिक स्थिति और गर्भनिरोधक
- निर्धन श्रेणी के परिवारों में से 11.4% की परिवार नियोजन संबंधी जरूरतें पूरी नहीं हो पाती, उच्च श्रेणी में यह आंकड़ा 8.6 प्रतिशत मिला।
- महिलाओं द्वारा आधुनिक गर्भनिरोधकों का उपयोग भी निम्न आय वर्ग में 50.7% तो उच्च आय वर्ग में 58.7% था।
- कामकाजी महिलाओं में से 66.3 प्रतिशत आधुनिक गर्भनिरोधक उपयोग करती हैं। वहीं, बेरोजगार महिलाओं में यह आंकड़ा सिर्फ 53.4 प्रतिशत है।
हर चौथा भारतीय मोटा
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के पांचवें चरण के आंकड़ों के अनुसार यूं तो भारत में सेहत के हर पैमाने पर पिछले चार साल में सुधार आया है लेकिन इसी अवधि में खान-पान की गलत आदतों और व्यायाम की कमी से मोटापा तेजी से बढ़ा है। 4 साल पहले 21 प्रतिशत महिलाएं मोटी थीं, लेकिन अब 24 प्रतिशत। मोटे पुरुष भी 19 से बढ़कर 23 प्रतिशत हो चुके हैं। यानी हर चार में एक महिला और पुरुष मोटापे के शिकार हैं।
- स्वास्थ्य देखभाल, घरेलू खर्च और रिश्तेदारों से मिलने-जुलने जैसे निर्णयों में महिलाओं की पूछ बढ़ी।
- शहरों में ऐसा 81% और गांवों में 77% परिवारों में हो रहा है।
- नगालैंड, मिजोरम में यह संख्या 99 प्रतिशत है।
अधूरे शारीरिक विकास वाले बच्चे घटे
5 साल से छोटे 36 प्रतिशत बच्चों में धीमा या अधूरा शारीरिक विकास (स्टंटिंग) मिला, पिछली बार यह 38 प्रतिशत था। गांवों में ऐसे बच्चे 37% और शहरों में 30% थे। हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और सिक्किम में सबसे ज्यादा 7% सुधार हुआ है।
संस्थागत प्रसव बढ़ा
अस्पताल में 89% बच्चे पैदा हुए। पहले आंकड़ा 79% था। ग्रामीण क्षेत्रों में 87 व शहरों में 94% संस्थागत प्रसव हुए। असम, बिहार, मेघालय, छत्तीसगढ़, नागालैंड, मणिपुर, उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल में 10 प्रतिशत संस्थागत प्रसव बढ़े।
सर्वे में 8.25 लाख लोग शामिल
एनएफएचएस-5 भारत के 6.37 लाख घर-परिवारों पर आधारित है। यह परिवार 28 राज्यों व 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 707 जिलों में रहते हैं। सर्वे में कुल 7,24,115 महिलाएं और 1,01,839 पुरुषों से जवाब लिए गए।