राजधानी दिल्ली को वायु प्रदूषण प्रबंधन में कुछ विशेष कमियों को दूर करने के लिए इस साल राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 18 करोड़ रुपये की मदद मिलेगी। हालांकि, दिल्ली को एनसीपी के तहत ये रकम पहली बार मिल रही है।
2019 में शुरू होने के बाद से यह पहली बार है जब इस कार्यक्रम के तहत दिल्ली को धन प्राप्त होगा। एनसीएपी, 2024 तक पीएम 2.5 और पीएम 10 की सांद्रता में 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत की कमी लाने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है। इसके लिए आधार वर्ष 2017 रखा गया है।
2019 के बाद से प्रदूषण प्रबंधन में महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने के 18.74 करोड़ रुपये
एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली को एनसीएपी के तहत 18.74 करोड़ रुपये मिलेंगे। एनसीएपी उन 132 शहरों को कवर करता है, जो निर्धारित राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) को पूरा नहीं करते हैं। इन शहरों की पहचान राष्ट्रीय वायु निगरानी कार्यक्रम के तहत 2011-2015 की अवधि के दौरान प्राप्त परिवेशी वायु गुणवत्ता के आंकड़ों के आधार पर की गई है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी को दो साल के लिए एनसीएपी के तहत कोई धन नहीं मिला क्योंकि उसके पास अन्य संसाधन के रूप में 2 हजार सीसी से ऊपर के डीजल वाहनों पर लगाया जाने वाला ग्रीन सेस, जिसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास जमा किया जाता है और दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाणिज्यिक वाहन पर लगने वाला प्रदूषण कर उपलब्ध थे।