देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एक ओर नई वैक्सीन जल्द ही बाजार में आ सकती है। कोविड-19 वैक्सीन की नेजल वैक्सीन (नाक से दी जाने वाली वैक्सीन) पर भारत बायोटेक का काम अंतिम दौर में है। भारत बायोटेक ने कहना है कि, कंपनी को इसी महीने में नियामकीय लाइसेंस मिलने की उम्मीद है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक डॉक्टर कृष्णा एल्ला का कहना है कि अगर सब कुछ सही रहा तो इसी महीने में कंपनी को लाइसेंस मिल जाएगा। इस बीच देश में अगर कोई नया वैरिएंट आता है, तो नेजल वैक्सीन लगाकर काम करते रहना ज्यादा सहज होगा। भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के पास मंकीपॉक्स के लिए वैक्सीन बनाने की भी क्षमता है। गुजरात के अंकलेश्वर में उनकी कंपनी का प्लांट और जर्मनी में बावेरियन नॉर्डिक ही दो जगहें हैं, जिनके पास मंकीपॉक्स की वैक्सीन के उत्पादन की क्षमता है।
देश की दवा नियामक ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) ने भारत बायोटेक को नेजल वैक्सीन का नौ जगहों पर क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दी थी। डीजीसीआई ने इसके अलावा कंपनी को को वैक्सीन और नेजल वैक्सीन की क्षमता और सुरक्षा की तुलना करने की भी अनुमति प्रदान की थी।
कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जल्द ही लोगों को कोविड-19 से बचाने के लिए इंजेक्टेबल वैक्सीन के साथ.साथ नेजल वैक्सीन भी मिल जाएगी। कंपनी ने करीब 4000 वॉलंटियर्स के साथ नेजल वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल पूरा कर लिया है और इस दौरान एक भी अवांछित घटना सामने नहीं आई है। इस बीच देश में अगर कोरोना का कोई नया वैरिएंट आता है, तो उससे भी निपटा जा सकेगा।
डॉक्टर एल्ला ने नाक से दी जाने वाली वैक्सीन का समर्थन करते हुए कहा है कि कोई भी इंजेक्ट की जाने वाली वैक्सीन शरीर के निचले हिस्से को सुरक्षा प्रदान करती है, इसलिए वैक्सीन लेने के बावजूद लोगों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। नेजल वैक्सीन पूरे शरीर को सुरक्षा प्रदान करती है। कोविड-19 के वैरिएंट बीए 5 को लेकर कहा कि ये डेल्टा और ओमीक्रॉन वैरिएंट से बिलकुल अलग है। अगर यह वैरिएंट आक्रमण करता है तो हॉस्पिटलाइजेशन बढ़ सकता है।