हमारे सौर परिवार के दूसरे सबसे बड़े सदस्य शनि ग्रह की पहचान इसके वलय (छल्ले) हैं। सूर्य से नजदीकी के मामले में छठवें स्थान पर मौजूद शनि के चारों तरफ बने ये वलय दिलकश खूबसूरती के साथ ही तमाम दिलचस्प रहस्य समेटे हुए हैं, लेकिन 18 माह बाद ये ओझल हो जाएंगे।
नासा के मुताबिक, असल में शनि के अक्षीय झुकाव की वजह से 2025 के बाद से पृथ्वी से शनि के वलयों को देख पाना संभव नहीं होगा। शनि के वलय फिलहाल खत्म नहीं हो रहे हैं, बल्कि पृथ्वी पर दिखना बंद हो जाएंगे। इसके पीछे असल में शनि का अक्षीय झुकाव, पृथ्वी के साथ कोणीय स्थिति और पृथ्वी से दूरी के संयोग की वजह से हो रहा है।
धूमकेतुओं से बनीं संरचनाएं
4.6 अरब वर्ष पहले हमारा सौरमंडल बनने के कुछ समय बाद शनि के वलय बने। नासा के मुताबिक, ये संरचनाएं उन धूमकेतुओं व क्षुद्रग्रहों से बनी है, जो शनि के गुरुत्वाकर्षण से टूटकर उसकी कक्षा में फंसे रह गए हैं।
हमेशा के लिए हो जाएंगे खत्म
नासा के कैसिनी मिशन के डाटा से वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि येे वलय हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। हालांकि, ऐसा लाखों वर्ष बाद होगा। पृथ्वी से शनि 9 डिग्री के कोणीय झुकाव के साथ दिखता है। 2024 के अंत तक कोणीय झुकाव घटकर लगभग 3.7 डिग्री रह जाएगा। मार्च 2025 में यह झुकाव शून्य हो जाएगा, जिसकी वजह से पृथ्वी से वलय पतली समानांतर रेखा के रूप में दिखेंगे। दूरी की वजह से इन्हें पृथ्वी से देख पाना मुश्किल होगा। हालांकि, यह झुकाव 2032 के बाद फिर बदल जाएगा और पहले की तरह वलय दिख पाएंगे।