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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: पास होने के बाद लोकसभा और विधानसभाओं में क्या-क्या बदलेगा, अभी कैसी है इनकी तस्वीर?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 19 Sep 2023 03:49 PM IST

सार

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटों पर आरक्षण का प्रावधान है। इसी 33 फीसदी में से एक तिहाई सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी है। 
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नारी शक्ति अधिनियम - फोटो : AMAR UJALA
नए संसद भवन में पहले दिन की कार्यवाही के दौरान महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पेश हो गया। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसे सदन के पटल पर रखा। लोकसभा में विधेयक पास होने के बाद गुरुवार को इसे राज्य में पेश किया जाएगा। गुरुवार को ही इस पर राज्यसभा में चर्चा भी हो सकती है। विधेयक के पास होने और कानून बनने के बाद लोकसभा और विधानसभा में बहुत कुछ बदल जाएगा। आइये जानते हैं अधिनियम में किए गए प्रावधानों के बारे में...
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नारी शक्ति अधिनियम - फोटो : AMAR UJALA
नए संसद भवन में पहले दिन की कार्यवाही के दौरान महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पेश हो गया। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसे सदन के पटल पर रखा। लोकसभा में विधेयक पास होने के बाद गुरुवार को इसे राज्य में पेश किया जाएगा। गुरुवार को ही इस पर राज्यसभा में चर्चा भी हो सकती है। विधेयक के पास होने और कानून बनने के बाद लोकसभा और विधानसभा में बहुत कुछ बदल जाएगा। आइये जानते हैं अधिनियम में किए गए प्रावधानों के बारे में...

विधेयक पेश करते कानून मंत्री - फोटो : सोशल मीडिया
पास होने के बाद क्या बदलेगा?
मौजूदा समय में लोकसभा में कुल सदस्य संख्या 543 है। इस वक्त महिला सांसदों की संख्या 82 है। विधेयक पास होने के बाद लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 181 हो जाएगी। 



इस विधेयक में संविधान के अनुच्छेद- 239AA के तहत राजधानी दिल्ली की विधानसभा में भी महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाएगा। यानी, दिल्ली विधानसभा में भी 70 में से 23 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जाएगा। 

विधानसभाओं में क्या बदलेगा?

राज्य कुल सीट कानून बनने के बाद महिला विधायकों की संख्या
उत्तर प्रदेश 403 134
पश्चिम बंगाल 294 98
महाराष्ट्र 288 96
बिहार 243 81
तमिलनाडु 234 78
मध्य प्रदेश 230 76
कर्नाटक 224 74
राजस्थान 200 66
गुजरात 182 60
आंध्र प्रदेश 175 58
ओडिशा 147 49
केरल 140 46
असम 126 42
तेलंगाना 119 39
पंजाब 117 39
छत्तीसगढ़ 90 30
हरियाणा 90 30
जम्मू-कश्मीर 87 29
झारखंड 81 27
उत्तराखंड 70 23
दिल्ली 70 23
हिमाचल प्रदेश 68 22
त्रिपुरा 60 20
मणिपुर 60 20
मेघालय 60 20
अरुणाचल प्रदेश 60 20
नगालैंड 60 20
गोवा 40 13
मिजोरम 40 13
सिक्किम 32 10
पुडुचेरी 30 10

क्या अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर यह लागू होगा?
हां, यानी कोटा के अंदर कोटा भी इस कानून में प्रावधान होगा। इस तरह जो सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं उनमें से 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 

क्या जो लोकसभा या विधानसभा सीट महिला आरक्षित हो जाएगी तो वहां से हमेशा महिला जनप्रतिनिधि ही चुने जाएंगे?
नहीं ऐसा नहीं होगा। जो लोकसभा या विधानसभा सीट महिलाओं के एक चुनाव में आरक्षित होगी अगले चुनाव में वो महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं होगी। बल्कि अन्य 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसके बाद जो तीसरा चुनाव होगा उसमें बची हुई 33 फीसदी सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा। 

नया संसद भवन - फोटो : ANI
क्या यह प्रक्रिया इसी तरह जारी रहेगी?
यह प्रक्रिया सतत जारी रहने का प्रावधान भी नहीं है। मौजूदा बिल में महिला आरक्षण को 15 साल (आमतौर पर तीन चुनाव) के लिए लागू किया गया। इसके बाद संसद चाहे तो महिला आरक्षण को आगे बढ़ा सकती है। दिलचस्प ये है कि देश में जातिगत आरक्षण का प्रावधान भी दस साल के लिए लागू हुआ था, जो अब तक जारी है।   

क्या ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण है या नहीं?
1996 से जब जब महिला आरक्षण बिल आए तब तब यह मुद्दा उठा है। कई राजनीतिक दल पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए भी कोटा की मांग करते रहे हैं। हालांकि, इस बिल में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है।
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