मोदी ने कहा, युवावस्था सबसे अहम कालखंड होता है। आपका भविष्य और जीवन इस पर निर्भर करता है कि आप युवावस्था का इस्तेमाल कैसे करते हैं। मुझे विश्वास है कि भारत में यह दशक न केवल युवाओं के विकास का होगा, बल्कि युवाओं का विकास करने वाला साबित होगा। ऐसे युवाओं को आज कई शब्दों से पहचाना जाता है। कोई उन्हें मिलेनियल्स के रूप में जानता है तो कुछ उन्हें जेनेरेशन जेड या तो जेन जेड भी कहते हैं। लोगों के दिमाग में फिट हो गई है कि ये सोशल मीडिया जेनेरेशन है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया और भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के सूर्य के अध्ययन को लेकर महत्वाकांक्षी मिशन आदित्य और कश्मीर में बदलती सकारात्मक तस्वीर पर भी चर्चा की। पीएम ने रेडियो पर कहा, मैंने लालकिले से 15 अगस्त को देशवासियों को एक बात के लिए आग्रह किया था और मैंने कहा था कि हम देशवासी स्थानीय उत्पादों को खरीदने का आग्रह रखें। आज फिर से मेरा सुझाव है कि हम स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को प्रोत्साहन दें। अपनी खरीदारी में उन्हें प्राथमिकता दें। क्या हम स्थानीय उत्पादों को अपनी प्रतिष्ठा और शान से जोड़ सकते हैं। क्या हम इस भावना के साथ अपने साथी देशवासियों के लिए समृद्धि लाने का माध्यम बन सकते हैं। लोगों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं।
पीएम ने स्वदेशी के बारे में उदाहरण देते हुए कहा, उत्तर प्रदेश के फूलपुर में कुछ महिलाओं ने अपनी जीवटता से हर किसी को प्रेरणा दी है। कुछ समय पहले तक फूलपूर की यह महिला गरीबी से परेशान थीं। लेकिन इनमें अपने परिवार को आगे ले जाने का जज्बा था। महिलाओं ने चप्पल बनाने का काम शुरू किया। इससे महिलाओं ने न सिर्फ अपने राह का कांटा दूर किया, बल्कि खुद को आत्मनिर्भर बनाया। लोगों ने महिलाओं से चप्पलें खरीदकर उनकी मदद की।
पीएम ने संसद के शीतकालीन सत्र का जिक्र करते हुए कहा, आपने जिन प्रतिनिधियों को चुनकर संसद भेजा है। उन्होंने काम करने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। लोकसभा ने 114 फीसदी काम किया। राज्यसभा ने 95 फीसदी काम किया। सभी सांसद इसके लिए अभिनंदन के हकदार हैं। जिनको आपने चुनकर भेजा है उन्होंने 60 साल के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। बीते बजट सत्र में सांसदों ने संसद में 135 फीसदी काम किया।
सूर्यग्रहण का भी किया जिक्र
पीएम ने बीते 26 दिसंबर को दशक के आखिरी सूर्यग्रहण का जिक्र करते हुए कहा, युवा साथियों की तरह मैं भी सूर्यग्रहण देखने निकला। लेकिन अफसोस की दिल्ली में उस दिन आसमान में बादल छाए हुए थे। हालांकि, टीवी में कोझिकोड और बाकी जगह कुछ अच्छी तस्वीरें देखने को मिलीं। ग्रहण हमें याद दिलाते हैं कि हम पृथ्वी पर रहने के बावजूद अंतरिक्ष में घूम रहे हैं।
भारत में खगोल विज्ञान का प्राचीन और गौरवशाली इतिहास रहा है। आर्यभट्ट ने सूर्यग्रहण के साथ चंद्रग्रहण की व्याख्या की है। केरल में संगमग्राम के माधव ने ग्रहों की गणना करने का काम शुरू किया। 2016 में बेल्जियम के तत्कालीन प्रधानमंत्री और मैंने देवस्थल टेलिस्कोप का उद्घाटन किया था। इसे एशिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट कहा जाता है। सूर्य के अध्ययन के लिए इसरो आदित्य नाम का सैटेलाइट लॉन्च करने वाला है।