गैस स्टोव पर खाना पकाते समय गैस या डीजल से चलने वाले वाहनों की तुलना में हवा में अधिक नैनोकण उत्सर्जित होते हैं। इससे अस्थमा व सांस संबंधी अन्य बीमारियों के होने का खतरा बढ़ सकता है। यह तथ्य अमेरिका के पर्ड्यू विश्वविद्यालय के नए अध्ययन में यह सामने आया है।
अध्ययन की अगुवाई करने वाले पर्ड्यू के लाइल्स स्कूल ऑफ सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर ब्रैंडन बूर के अनुसार, घर के अंदर और बाहर दोनों जगह चीजों का जलना दुनियाभर में वायु प्रदूषण का एक स्रोत बना हुआ है। गैस स्टोव पर खाना पकाने से बड़ी मात्रा में छोटे नैनोकण उत्सर्जित होते हैं जो श्वसन तंत्र में प्रवेश कर वहां आसानी से जमा हो जाते हैं। पीएनएएस नेक्सस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन हवा में घुले नैनोकणों पर आधारित है। इनका व्यास एक से तीन नैनोमीटर है। यह श्वसन प्रणाली के कुछ हिस्सों तक पहुंचने और अन्य अंगों में फैलने के लिए बिल्कुल सही आकार है। शोध के दौरान पाया गया कि कई कण तेजी से अन्य सतहों पर फैल गए। इसके बाद मॉडल से पता चला कि लगभग 10 अरब से एक खरब कण एक वयस्क के फेफड़ों में जमा हो सकते हैं। बच्चों के लिए ये मात्रा और भी अधिक घातक होती है। मनुष्य की आयु जितनी कम होगी यह मात्रा उतनी ही अधिक जमा होगी। अध्ययन के दौरान पानी उबालने या गैस स्टोव पर ग्रिल्ड पनीर सैंडविच या छाछ पैनकेक बनाने के मात्र 20 मिनट के भीतर खरबों कणों का उत्सर्जन हुआ।
स्टोर पर खाना पकाते समय इन्हें मापने में सफलता मिली
ड्यूराग ग्रुप की सदस्य जर्मन कंपनी ग्रिम एयरोसोल टेक्निक की ओर से उपलब्ध कराए गए अत्याधुनिक वायु गुणवत्ता वाले उपकरण का उपयोग कर शोधकर्ता गैस स्टोव पर खाना बनाते समय इन छोटे कणों को एक नैनोमीटर तक मापने में सफल हुए। शोधकर्ताओं को ज्ञात हुआ कि प्रति किलोग्राम खाना पकाने के ईंधन में 10 क्वाड्रिलियन नैनोक्लस्टर एयरोसोल कण उत्सर्जित होते हैं। ये डीजल इंजन वाले वाहनों से उत्पन्न होने वाले कणों से अधिक होते हैं। ये कितने घातक हैं इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि व्यस्त सड़क पर खड़े होकर कार के धुएं की तुलना में घर के अंदर गैस स्टोव पर खाना पकाते समय 10 से 100 गुना अधिक नैनोक्लस्टर एयरोसोल में सांस लेते हैं।