नालासोपारा हथियार बरामदगी मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बम बनाने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत दे दी है। साल 2018 में महाराष्ट्र के नालासोपारा में हथियारों का जखीरा बरामद हुआ था। पुलिस ने जांच के दौरान बम बनाने के आरोप में सनातन संस्था के एक सदस्य को अरेस्ट किया गया था। नापाक मंसूबा पाल रहे आरोपी पुणे में सनबर्न फेस्टिवल में धमाके से दहशत फैलाने की योजना बना रहे थे।
दक्षिणपंथी समूह सनातन संस्था का सदस्य
बंबई उच्च न्यायालयसे मिली जमानत के मामले में एक रिपोर्ट के अनुसार, 44 वर्षीय एक व्यक्ति को कथित तौर पर कच्चे बम बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार आरोपी पुणे में सनबर्न फेस्टिवल को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। 2018 में गिरफ्तार शख्स का बैकग्राउंड चेक करने पर पुलिस को पता चला कि बम बनाने का आरोपी दक्षिणपंथी समूह सनातन संस्था का सदस्य है।
20 सितंबर को जमानत का फैसला, दो हफ्ते बाद आया आदेश
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट में दो जजों- न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमूर्ति गौरी गोडसे की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद है। हाईकोर्ट ने विगत 20 सितंबर को वैभव राउत को जमानत पर रिहा करने का फरमान सुनाते हुए कहा, वह पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं और मामले की सुनवाई जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है। हाईकोर्ट की तरफ से रिहाई का आधिकारिक आदेश दो हफ्ते बाद शुक्रवार, 6 अक्टूबर को उपलब्ध कराया गया।
बॉम्बे हाईकोर्ट सनातन संस्था पर क्या बोला?
पीठ ने यह भी कहा कि राउत के खिलाफ अभियोजन पक्ष के मामले की पुष्टि नहीं हुई कि उसने बम तैयार किए थे। हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि जिस गोदाम से बम बरामद किए गए थे, वह राउत का नहीं था। इसी मामले में एक और आरोपी को जमानत देने वाले आदेश का जिक्र करते हुए खंडपीठ ने कहा, आरोपी वैभव और सनातन संस्था कोई ऐसा संगठन नहीं है जिसे केंद्र सरकार की किसी एजेंसी या पुलिस की तरफ से प्रतिबंधित या आतंकवादी संगठन घोषित किया गया हो।
यूएपीए कानून के तहत कम से कम पांच साल की कैद
बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने अपने जमानत आदेश में कहा कि राउत के पास न तो घर का मालिकाना हक है, न ही गोदाम उसका है जहां से कथित तौर पर बम बरामद किये गये थे। हाईकोर्ट ने कहा, गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत न्यूनतम सजा 5 साल है। सजा को अधिकतम आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। जमानत की अपील कर रहा आरोपी वैभव राउत पुलिस की हिरासत में है। पिछले 5 वर्षों से जेल में बंद राउत के मामले की सुनवाई निकट भविष्य में समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाए।
अपील के 10 महीने बाद रिहाई के आदेश
इससे पहले दिसंबर 2022 में एक विशेष अदालत ने वैभव की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। राहत की गुहार के साथ राउत ने इसी साल जनवरी में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। करीब 10 महीने बाद राउत को जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया गया।
जमानत याचिका में वैभव ने क्या दलीलें दीं?
बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर जमानत याचिका में, राउत की वकील सना रईस खान ने कहा, इस मामले के तीन अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जिस गोदाम से कच्चे बम बरामद किए गए, वह किसी और का था, न कि आरोपी वैभव राउत का।
आतंकवादी गिरोह की मदद से हिंदू राष्ट्र बनाने का षड्यंत्र
राउत पर शिकंजा कसने का भरपूर प्रयास करते हुए अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि राउत और अन्य आरोपी दक्षिणपंथी समूह सनातन संस्था के सदस्य थे। इनका मकसद गुप्त रूप से महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों में एक आतंकवादी गिरोह बनाना और हिंदू राष्ट्र बनाना था।
दहशत फैलाने के नापाक मंसूबे
कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के अनुसार महाराष्ट्र पुलिस और एटीएस ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों ने पुणे में सनबर्न फेस्टिवल में धमाके की साजिश रची। फेस्टिवल में धमाका कर दहशत कायम करने का नापाक मंसूबा पाल रहे आरोपियों ने पहले कच्चे बम जमा किए। इसके बाद विस्फोटकों को राउत के घर और गोदाम पर छिपाया गया।
कौन से कानून की धाराओं में आरोपी बने वैभव राउत?
गौरतलब है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के बाहरी इलाके नालासोपारा में एक गोदाम से कथित तौर पर कच्चे बम बरामद हुए थे। 2018 में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की अलग-अलग धाराओं में आरोप लगाने के बाद वैभव राउत को पांच साल पहले गिरफ्तार किया था।