नगालैंड में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में नागरिकों की हत्या दरअसल भ्रम में हुई थी। सूत्रों के अनुसार सुरक्षा बलों को इलाके में आतंकी गतिविधियों की खुफिया सूचना मिली थी, जिसके आधार पर आतंकियों से निपटने के लिए यह अभियान चलाया गया था।
नगालैंड के मोन जिले में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 13 नागरिकों की मौत होने के बाद अब जानकारी सामने आई है कि इलाके में विशेष बलों को खुफिया एजेंसियों से इलाके में एनएससीएन (केवाई) और उल्फा के आतंकवादियों की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली थी। सुरक्षा बलों में सूत्रों ने बताया कि यह जानकारी मिलने के बाद निगरानी और आतंकियों पर हमला करने के लिए जिले के तिरु इलाके में सुरक्षा बलों की विभिन्न टीमों को तैनात किया गया था।
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सूत्रों ने बताया कि बोलेरो में यात्रा कर रहे नागरिक घात लगाकर हमला करने के लिए तैनात पहली टीम को पार करने के बाद दूसरी टीम के पास पहुंचे थे जब सुरक्षा बलों ने उनपर गोलियां बरसा दी थीं। शुरुआती गोलीबारी में छह नागरिक मारे गए। सुरक्षा बलों को इसलिए शक हुआ क्योंकि बोलेरो में सवार यात्रियों के पास एक रायफल थी। इसके बाद सुरक्षा बल पुलिस का इंतजार कर रहे थे जब इन हत्याओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे 200 से अधिक लोगों ने उन्हें घेर लिया।
इसके बाद की गई गोलीबारी में सात और नागरिकों की मौत हो गई। साथ ही घटना में 13 अन्य लोगों के घायल होने की सूचना है। सूत्रों ने हताया कि विरोध कर रहे लोग बहुत आक्रोशित थे और मशालें लिए हुए थे। इन लोगों ने एक जवान पर हमला कर दिया जिसमें उसकी जान चली गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं। इस दौरान सात और नागरिकों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। घायलों में नागरिकों के साथ सेना के अधिकारी भी शामिल रहे।
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सेना ने जताया खेद, मामले की जांच शुरू
नागालैंड क्षेत्र 3 कोर के अधीन है जो असम राइफल्स के साथ राज्य की देखभाल करता है। घटना में शामिल स्पेशल फोर्स यूनिट 3 कोर से संबद्ध है और इस क्षेत्र में विशेष ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार है। आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शुरू किए गए अभियान के गलत मोड़ ले लेने का बाद सेना की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि हमें इस हादसे पर बहुत खेद है। इस मामले की जांच एक कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की ओर से उच्चतम स्तर पर की जा रही है।