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मैसूर दशहरा: विवाद के बावजूद कार्यक्रम में पहुंची लेखिका बानु मुश्ताक, कहा- यह सभी का त्योहार, कोई पराया नहीं

Mon, 22 Sep 2025 02:53 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैसूर।

सार

सरकारी निमंत्रण के खिलाफ विरोध के बावजूद बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानु मुश्ताक मैसूर में दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। उन्होंने कहा, हमारी संस्कृति हमारी जड़ है, सद्भावना हमारी ताकत है और अर्थव्यवस्था हमारे पंख हैं। हमें एक ऐसा समाज बनाना है, जो मानवता और प्रेम से भरा हो और जिसमें शिक्षा, अर्थव्यवस्था और उद्योग भी मजबूत हो। उसमें सभी को बराबरी का मौका मिलना चाहिए।
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सिद्धारमैया, बानु मुश्ताक - फोटो : एएनआई/वीडियो ग्रैब/एक्स
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानु मुश्ताक ने सोमवार को मैसूर में दशहरे का शुभारंभ किया और कहा कि यह त्योहार कर्नाटक की मिली-जुली संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मैसूर की अधिष्ठात्री देवी चामुंडेश्वरी नारी की शक्ति और उसकी मजबूत इच्छाशक्ति का प्रतीक हैं। नारी केवल कोमलता और मातृत्व स्नेह की प्रतीक नहीं है, बल्कि अन्याय से लड़ने वाली ताकत की भी पहचान है। 
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प्रसिद्ध 11 दिवसीय दशहरा सोमवार को पारंपरिक तरीके से हर्षोल्लास के साथ शुरू हुआ। बानु मुश्ताक ने इसका उद्घाटन किया। हालांकि, उद्घाटन से पहले कुछ वर्ग के लोगों ने बानु मुश्ताक को आमंत्रित करने के सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई थी, जिससे यह एक विवाद का विषय बन गया था। मुश्ताक ने शुभ 'वृश्चिक लग्न' के दौरान चामुंडेश्वरी मंदिर में देवी की मूर्ति पर फूल चढ़ाकर वैदिक मंत्रों के बीच दशहरे का उद्घाटन किया। इससे पहले वह मुख्यमंत्री के साथ मंदिर पहुंचीं और पूजा की। 

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'हमारी संस्कृति हमारी जड़, सद्भावना हमारी ताकत'
बानु मुश्ताक ने अपने संबोधन में कहा, हमारी संस्कृति हमारी जड़ है, सद्भावना हमारी ताकत है और अर्थव्यवस्था हमारे पंख हैं। हमें एक ऐसा समाज बनाना है, जो मानवता और प्रेम से भरा हो और जिसमें शिक्षा, अर्थव्यवस्था और उद्योग भी मजबूत हो। उसमें सभी को बराबरी का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका हिंदू धर्म के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव रहा है। मुश्ताक ने कहा, मैं कई धार्मिक आयोजनों में गई हूं, दिए जलाए हैं, फूल चढ़ाए हैं और मंगल आरती की है। यह मेरे लिए नया नहीं है। 

अब जाकर पूरा हुआ चामुंडेश्वरी मंदिर आने का वादा
उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और सरकार का आभार जताया कि उन्होंने विरोध के बावजूद नैतिक समर्थन दिया और उन्हें दशहरा उद्घाटन का मौका दिया। बानु मुश्ताक ने कहाकि चामुंडेश्वरी देवी के आशीर्वाद से यह उद्घाटन संभव हुआ और यह उनके जीवन का सबसे सम्मानजनक क्षण है। मुश्ताक ने एक पुराना वादा पूरा होने की बात कही। उन्होंने बताया कि जब उनका नाम बुकर पुरस्कार के लिए नामित हुआ था, तब मैसूर की एक लेखिका मित्र ने चामुंडेश्वरी से प्रार्थना की थी कि अगर पुरस्कार मिला तो उन्हें मंदिर ले जाएंगे। उन्होंने कहा, अब जाकर यह वादा पूरा हुआ है। लेखिका ने कहा, इतने विवादों के बावजूद देवी चामुंडेश्वरी ने मुझे यहां बुलाया और मैं आपके सामने खड़ी हूं। 
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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें कर्नाटक सरकार के बानु मुश्ताक को उद्घाटन का निमंत्रण देने के फैसले को चुनौती दी गई थी। बानु मुश्ताक ने कहा, दशहरा हमारी सामूहिक संस्कृति का प्रतीक है। मैसूर राजाओं की सांस्कृतिक विरासत से लेकर हमारे दिलों में गूंजती कन्नड़ भाषा तक, यह पर्व विविधता में एकता की खुशबू का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि मैसूर के उर्दू भाषी लोगों की अपनी संस्कृति है और नवरात्रि के हर दिन का नाम उर्दू में भी होता है। इस पर्व में कोई पराया नहीं है। यह सभी का त्योहार है। 

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