सीएम एकनाथ शिंदे, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे
- फोटो : ANI / X / @mieknathshinde
महाराष्ट्र विधानसभा को लेकर लगातार तेज हो रहे अटकलों के बीच मंगलवार को चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया। आयोग ने महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को एक चरण में मतदान कराने का फैसला लिया है। तारीखों के एलान के बाद से ही राजनीतिक पार्टियों में हलचल तेज हो गई है। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना और एनसीपी में विभाजन के बाद नेताओं के बदलते गुट, खंडित राजनीति, मराठा आरक्षण आंदोलन और हर मुद्दें पर सरकार को घेरने को तैयार बैठा विपक्ष के साथ इस विधानसभा चुनाव में रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा।
सीएम शिंदे का मास्टर स्ट्रोक
महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने इस चुनावी समीकरण को ठीक करने और जनता को लुभाने के लिए कुछ मास्टर स्ट्रोक तैयार किए है। बात अगर लोकसभा चुनाव की करें तो महाराष्ट्र में एनडीए का खराब प्रदर्शन रहा, जिसके बाद जनता की मंशा को ध्यान में रखते हुए सीएम शिंदे ने अपनी प्रमुख योजना, लड़की बहन योजना पर दांव खेला है। इस योजना के तहत गरीब महिलाओं को 1,500 रुपये का मासिक वजीफा मिलता है। 46,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की कल्याणकारी योजना को महायुति के लिए मास्टर स्ट्रोक के तौर पर समझा जा रहा है। बता दें कि महायुति गुट में भाजपा, शिंदे की शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शामिल है।
लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष के हौसले बुलंद
महाराष्ट्र में महायुति और महा विकास अघाड़ी के बीच सीधे तौर पर मुकाबला है। महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की बात करें तो इसमें कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और वरिष्ठ राजनेता शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) गुट शामिल हैं। अब अगर लोकसभा चुनाव 2024 की बात करें तो महाराष्ट्र में एमवीए ने 48 में 30 सीटें जीती वहीं सत्तारूढ़ महायुति केवल 17 सीट जीत पाई। लोकसभा चुनाव के इस प्रदर्शन से विपक्षी गठबंधन के हौसले बुलंद दिख रहे है, लेकिन इस बात को ध्यान में रखना आवश्यक होगा कि विधानसभा चुनाव एक अलग राजनीतिक खेल होने जा रहा है क्योंकि राज्य और स्थानीय स्तर के मुद्दे प्रचार पर हावी रहेंगे। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि महाराष्ट्र का राजनीतिक माहौल पहले कभी इतना गर्म नहीं रहा, जिसमें छह मुख्य दल प्रभाव के लिए होड़ कर रहे हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति का हाल
महाराष्ट्र की राजनीति में कई सारे राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिले। जिसमें एमवीए सरकार का पतन और नए राजनीतिक गुटों का उदय शामिल है। इसके साथ ही चुनाव-पूर्व गठबंधन का टूटना, तीन दिन की सरकार सहित तीन सरकारें, दो प्रमुख दलों में विभाजन और चुनाव आयोग द्वारा अलग हुए समूहों को वास्तविक मानना मुख्य रूप से शामिल है। अब इस चुनावी उथल-पुथल को ऐसे समझिए कि, महाराष्ट्र में जून 2022 में सरकार में बदलाव देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए सरकार उनकी पार्टी शिवसेना में विद्रोह के बाद गिर गई। इसके बाद शिंदे ने भाजपा के समर्थन से ठाकरे की जगह ली। 2019 के विधानसभा चुनावों ने कई समीकरण बदल दिए। सबसे पहले, मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर शिवसेना-भाजपा के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन टूट गया। बाद में, शिवसेना ने ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिला लिया।