राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, एमवीए के घटक दलों शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और कांग्रेस ने सीट बंटवारे पर चर्चा के लिए शनिवार को अपनी अंतिम बैठक की। कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भी केसी वेणुगोपाल और शरद पवार के साथ बैठक में भाग लिया। उन्होंने कहा, हमने छोटे महत्वपूर्ण पहलुओं को हल कर लिया है।
प्रकाश आंबेडकर की प्रतिक्रिया का इंतजार
एमवीए वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) प्रमुख प्रकाश आंबेडकर के साथ बातचीत कर रही है और चार सीट की पेशकश पर उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा, जब संविधान खतरे में हो तो सभी को अपने मतभेदों को खत्म करना चाहिए और एक साथ आना चाहिए। राउत ने कहा, हमने उन्हें (वीबीए) चार सीट के लिए एक प्रस्ताव दिया है और उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार है। जिसके बाद हम सीट बंटवारे का अपना फॉर्मूला जारी करेंगे।
19 अप्रैल से लोकसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू
18वीं लोकसभा के लिए चुनाव 19 अप्रैल से शुरू होंगे और मतगणना चार जून को होगी। महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीट हैं और उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीट के बाद यह सबसे ज्यादा संख्या है।
'देश के बारे में ज्यादा सोचते हैं राहुल गांधी'
राउत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो न्याय' के बारे में सवाल पूछे जाने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, राहु गांधी राजनीति कम करते हैं और आम आदमी के मुद्दों को उजागर करते हैं और उनके बारे में जागरूकता पैदा करते हैं। वह देश के बारे में अधिक सोचते हैं। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने आगे कहा, राहुल गांधी मणिपुर गए लेकिन प्रधानमंत्री ने अब तक राज्य का दौरा नहीं किया। क्या वजह है? क्या मणिपुर मोदी के परिवार में नहीं आता है? वह गुजरात से आगे नहीं देख सकते।
'कांग्रेस न होती तो एकजुट नहीं रह पाता देश'
किताब 'व्हाट इफ देयर वाज नो 'कांग्रेस: द अनसेंसर्ड हिस्ट्री ऑफ इंडिपेंडेंट इंडिया' के विमाचन में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा, अगर कांग्रेस नहीं होती तो देश को आजादी, आधुनिक नेतृत्व पाकिस्तान के टुकड़े, भारत के विभाजन का बदला, ज्ञान-विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में देश का विकास नहीं होता। इन सबके ऊपर देश एकजुट नहीं रह पाता। हमारे बीच कुछ मतभेद हो सकते हैं। उन्होंने कहा, ये सारी बातें भाजपा की समझ से परे हैं। अगर भाजपा नहीं होती तो दंगे नहीं होते। रुपया मजबूत होता। देश की छवि अच्छी होती। चुनावी बॉन्ड और राफेल घोटाला नहीं होता।