अगर अफगान फौज, तालिबान के साथ सीधी टक्कर लेती तो बहुत लोग मारे जाते। इस पर दो सप्ताह पहले मस्जिद के संदेश पत्र में कहा गया था कि तालिबान और अफगान, इंसानी जान को पहले सुरक्षित करने के बारे सोचें। अभी वहां पर भगदड़ मची है। उम्मीद करते हैं कि चंद दिनों बाद वहां का माहौल कुछ बदला सा नजर आए। इसे तालिबान की मजबूरी कहें कि उसे दुनिया के सामने खुद को बदलकर दिखाना होगा। उसे भी तो दुनिया से आर्थिक मदद की जरूरत है।
पाकिस्तान का प्रधानमंत्री कुछ बोलता रहे, उससे हमें कोई मतलब नहीं है। भारत का मुसलमान शांतिपूर्वक तरीके से रहने वाला समुदाय है। चाहे वह खुश हो या न हो, लेकिन अपनी समस्या का हल कराने के लिए वह विदेशी मुल्कों की तरफ नहीं देखता। उसे पड़ोसी मुल्क से कोई लेना देना नहीं है। अगर कोई मुल्क खुद से ये कहे कि वह भारत के मुसलमानों की मदद करना चाहता है तो हम कह देंगे कि यह आपका काम नहीं है। यह भारत का निजी मामला है, हम खुद ही निपट लेंगे।
मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम अहमद ने कहा, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ जब भारत आए थे तो उन्होंने एक विवादित बयान दे दिया था। तब भी दिल्ली के कई इमामों ने एक साथ मिलकर मुशर्रफ को जवाब दिया। इमाम ने कहा था कि उन्हें यहां बोलने का हक नहीं है। हिंदू-मुस्लिम सगे भाईयों की तरह रहते हैं। हमें दफन यहीं पर होना है। यही मुसलमान की देशभक्ति है।
मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम अहमद ने कहा, उनकी पीएम मोदी और भारत सरकार से एक अपील है। आजकल सोशल मीडिया में धार्मिक उन्माद फैलाने वाले वीडियो वायरल किए जा रहे हैं, उन पर रोक लगाई जाए। जो मार रहा है, वही वीडियो बना रहा है। उसे वायरल भी वही कर रहा है। दिल्ली के अलावा देश के दूसरे इलाकों में आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। ये वीडियो दुनिया देखती है। उससे किसका अपमान होता है, इसका अंदाजा लगाएं। पुलिस के सामने मुसलमानों पर अत्याचार होता है, लेकिन कोई कुछ बोलता नहीं है।
देश में 80 फीसदी हिंदू-मुस्लिम एक साथ मिलकर रहना चाहते हैं। दस फीसदी ऐसे हैं जो तटस्थ हैं। बाकी बचे दस फीसदी लोगों में शरारती तत्व हैं जो अपना एजेंडा चलाते हैं। इनमें राजनेता भी हो सकते हैं। खैर, इन सबके बावजूद भारत के मुसलमानों को कोई डर नहीं है। देश में उनके साथ कुछ जगहों पर ठीक व्यवहार नहीं होता, उसके लिए पीएम मोदी को कठोर कदम उठाने होंगे। चाहे स्थितियां कितनी भी खराब हो जाएं, लेकिन हिंदुस्तान का मुसलमान दूसरे मुल्क की तरफ नहीं देखेगा।