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Waqf Act: 'हमारी लड़ाई जारी रहेगी..', वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोले मुस्लिम नेता

Mon, 15 Sep 2025 11:48 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने अपने आदेश में कानून की धारा 3 (1) पर रोक लगा दी। इस धारा के तहत वक्फ के नाम जमीन दान करने के लिए पांच साल से इस्लाम धर्म का पालन करने की शर्त है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ संशोधन अधिनियम पर अहम फैसला देते हुए कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगा दी है। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर अब प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य सैयद कासिम रसूल इलियास का कहना है कि, 'काफी हद तक हमारी बात मान ली गई है। 'वक्फ बाय यूजर' वाली हमारी बात मान ली गई है। इसके साथ ही, संरक्षित स्मारकों पर हमारी बात भी मानी गई है कि कोई तीसरा पक्ष दावा नहीं करेगा। जो पांच साल का नियम लगाया गया था, उसे हटा दिया गया है। मैं कहना चाहता हूं कि कुल मिलाकर हमारी कई बातें मान ली गई हैं, और हमें लगता है कि फैसला काफी हद तक संतोषजनक है।'
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कांग्रेस सांसद बोले- हमारी लड़ाई जारी रहेगी
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा, 'यह वाकई एक अच्छा फैसला है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की साजिश और इरादों पर लगाम लगाई है। जमीन दान करने वाले लोग इस बात से डरते थे कि सरकार उनकी जमीन हड़पने की कोशिश करेगी। यह उनके लिए राहत की बात है। सरकार कैसे तय करेगी कि कौन पांच साल से मुसलमान है? यह आस्था का मामला है। हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।'

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ईदगाह इमाम और एआईएमपीएलबी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, 'हमारी मांग थी कि पूरे कानून पर रोक लगाई जाए, लेकिन कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया। हालांकि, कोर्ट ने कई प्रावधानों पर रोक लगाई है, और हम इसका स्वागत करते हैं, जैसे कि जो व्यक्ति वक्फ करना चाहता है, उसे कम से कम 5 साल तक मुस्लिम धर्म का पालन करना अनिवार्य होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि सीईओ मुस्लिम समुदाय से होना चाहिए, और किसी संपत्ति को वक्फ करने या न करने का फैसला लेने की जिला कलेक्टर की शक्तियों पर भी रोक लगा दी गई है। धारा 3 और 4 पर रोक एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है। हमें उम्मीद है कि जब भी अंतिम फैसला आएगा, हमें सौ फीसदी राहत मिलेगी।'
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ये भी पढ़ें- Waqf Act: 'पूरे कानून पर रोक लगाने का मामला नहीं बनता', कुछ धाराओं को संरक्षण देते हुए शीर्ष कोर्ट की टिप्पणी

कांग्रेस ने किया फैसले का स्वागत
कांग्रेस ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम के कई प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगाने वाले सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए इसे न्याय, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक मूल्यों की जीत बताया। पार्टी ने कहा कि यह कानून में मौजूद दुर्भावनापूर्ण इरादों को ध्वस्त करने में एक लंबा रास्ता तय करता है। कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने कहा कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश न केवल उन दलों के लिए एक बड़ी जीत है, जिन्होंने संसद में इस मनमाने कानून का विरोध किया था, बल्कि संयुक्त संसदीय समिति के उन सभी सदस्यों के लिए भी एक बड़ी जीत है, जिन्होंने विस्तृत असहमति नोट प्रस्तुत किए थे, जिन्हें तब नजरअंदाज कर दिया गया था, लेकिन अब वे सही साबित हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की इन धाराओं पर लगाई रोक
वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने अपने आदेश में कानून की धारा 3 (1) पर रोक लगा दी। इस धारा के तहत वक्फ के नाम जमीन दान करने के लिए पांच साल से इस्लाम धर्म का पालन करने की शर्त है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य सरकारें ऐसे नियम तय करें, जिनसे ये पता चल सके कि कोई व्यक्ति पांच साल या उससे भी ज्यादा समय से इस्लाम धर्म का पालन कर रहा है। अदालत ने कहा कि इन नियमों के बिना कानून के इस प्रावधान का मनमाना इस्तेमाल हो सकता है।

सरकार द्वारा नामित अधिकारी को ये अधिकार देने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन कानून की धारा 3सी(2) के उस प्रावधान पर भी रोक लगा दी गई है, जिसके अनुसार किसी वक्फ संपत्ति को तब तक वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा जब तक कि सरकार का नामित अधिकारी यह रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देता कि उस पर अतिक्रमण है या नहीं। साथ ही, न्यायालय ने धारा 3सी(3) पर भी रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया है अगर नामित अधिकारी यह निर्धारित करता है कि संपत्ति सरकारी संपत्ति है, तो उसे राजस्व अभिलेखों में आवश्यक सुधार करने होंगे और इस संबंध में राज्य सरकार को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।' अदालत ने धारा 3सी(4) पर भी रोक लगाई है, जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार, नामित अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त होने पर, बोर्ड को अभिलेखों में उचित सुधार करने का निर्देश देगी।
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गैर मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने की दी मंजूरी
वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिमों की नियुक्ति के प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय वक्फ परिषद में अधिकतम चार और राज्य वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन गैर मुस्लिम सदस्य ही हो सकते हैं। अदालत ने ये भी कहा कि जहां तक संभव हो बोर्ड का सीईओ मुस्लिम समुदाय से होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संपत्ति के पंजीकरण संबंधी प्रावधानों में कोई भी दखल देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न पक्षों को सुनने के बाद बीती 22 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 


 
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