सर्वोच्च न्यायालय ने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के उस प्रावधान पर रोक लगा दी है, जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को वक्फ बनाने के लिए पांच वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना आवश्यक था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह प्रावधान तब तक स्थगित रहेगा, जब तक यह निर्धारित करने के लिए नियम नहीं बन जाते कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के सभी प्रावधानों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, न्यायालय का कहना है कि कुछ धाराओं को संरक्षण की आवश्यकता है।
'मूल चुनौती धारा 3(आर), 3सी, 14,...'
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'हमने माना है कि अनुमान हमेशा कानून की संवैधानिकता पर आधारित होता है। दुर्लभतम मामलों में ही ऐसा किया जा सकता है। हमने पाया है कि पूरे अधिनियम को चुनौती दी गई है, लेकिन मूल चुनौती धारा 3(आर), 3सी, 14,... थी।'
गैर-मुस्लिम को सीईओ के रूप में नियुक्त करने वाले संशोधन पर रोक से इनकार
कोर्ट ने निर्देश दिया कि जहां तक संभव हो, वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी एक मुस्लिम होना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने गैर-मुस्लिम को सीईओ के रूप में नियुक्त करने की अनुमति देने वाले संशोधन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य वक्फ बोर्डों और केंद्रीय वक्फ परिषदों में गैर-मुस्लिमों की संख्या तीन से अधिक नहीं हो सकती।