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मुर्शिदाबाद हिंसा: पिता-पुत्र हत्या मामले में नए खुलासे; 13 लोगों के खिलाफ बंगाल पुलिस के आरोप पत्र क्या-क्या?

Sat, 07 Jun 2025 10:37 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ 11 अप्रैल को  मुर्शिदाबाद में प्रदर्शन हुआ था। 12 अप्रैल को शमशेरगंज में भीड़ ने हरगोविंद दास और उनके पुत्र चंदन दास की हत्या कर दी थी। मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। इसमें 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। 
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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुर्शिदाबाद दंगे के दौरान मारे गए पिता-पुत्र की हत्या मामले में नए खुलासे किए हैं। पुलिस कहा है कि दोनों को घर का दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला गया और कुल्हाड़ी से हमला किया गया। जब तक वह मर नहीं गए तब तक एक आरोपी वहीं खड़ा रहा। मामले में पुलिस ने 13 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है।
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वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ 11 अप्रैल को  मुर्शिदाबाद में प्रदर्शन हुआ था। 12 अप्रैल को शमशेरगंज में भीड़ ने हरगोविंद दास और उनके पुत्र चंदन दास की हत्या कर दी थी। इसके अलावा दंगो में तीन लोग मारे गए और कई घायल हो गए। जबकि सैकड़ों लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमने 55 दिन के भीतर जिला अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है और इसमें 13 लोगों के नाम शामिल किए हैं। इसके अलावा पुलिस ने मुर्शिदाबाद के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज 60 से अधिक प्राथमिकियों के संबंध में 300 से अधिक संदिग्ध उपद्रवियों को गिरफ्तार किया था। 

जब तक मरे नहीं तब तक खड़ा रहा आरोपी
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार बेटबोना गांव में दास परिवार के घर को निशाना बनाया गया था। हमलावरों ने मुख्य दरवाजा तोड़ दिया और चंदन दास, हरगोबिंदो दास को बाहर निकाला और उनकी पीठ पर कुल्हाड़ी से वार किया। बताया जाता है कि एक व्यक्ति तब तक पहरा देता रहा जब तक कि वे मर नहीं गए। हालांकि आरोप पत्र में नामित लोगों या उन पर लगाई गई धाराओं की जानकारी नहीं दी गई है। 
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हाईकोर्ट की जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तय किए आरोप

मुर्शिदाबाद हिंसा की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। पुलिस ने जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आरोप तय किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि मुख्य हमला शुक्रवार, 11 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे के बाद हुआ, जिसका नेतृत्व स्थानीय पार्षद महबूब आलम कर रहा था। उसके साथ हजारों लोग थे। बेदवना गांव में 113 घरों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया गया, जो रहने लायक नहीं रह गए हैं। इसके आधार पर पुलिस ने आरोप तय किए हैं। 

पानी के कनेक्शन तक काटे ताकि आग न बुझा पाएं
रिपोर्ट के अनुसार, इलाके में बड़े पैमाने पर आगजनी, लूटपाट हुई और दुकानों व मॉल को नष्ट किया गया। हमलावर शमशेरगंज, हिजालताला, शिउलिताला, डिगरी के ही रहने वाले थे और अपना चेहरा ढंककर आए थे। हमलावरों ने पानी के कनेक्शन भी काट दिए, ताकि आग बुझाई न जा सके। हमले से गांव की महिलाओं में दहशत व्याप्त हो गई थी और उन्होंने दूसरी जगहों पर अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ली। समिति ने कहा था कि हिंसा के दौरान पुलिस ने भी निष्क्रियता दिखाई। वर्दीधारी पुलिसकर्मियों ने स्थानीय लोगों के फोन कॉल का जवाब नहीं दिया था।
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वक्फ कानून के विरोध में भड़की थी हिंसा
बता दें कि, केंद्र सरकार की तरफ से वक्फ संशोधन विधेयक को जब संसद में पेश किया गया, उसी वक्त ही राज्य में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। लेकिन जब ये विधेयक संसद से पास होकर कानून बना तो प्रदर्शन हिंसक हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में अर्द्धसैनिक बलों की 16 कंपनियां भेजीं। मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के दौरान कई हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया था और इनमें तोड़फोड़ हुई थी। 

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