पूर्वोत्तर भारत की रेल कनेक्टिविटी को ऐतिहासिक बढ़त देते हुए मुरकंगसेलेक–सिल्ले (15.70 किमी) नवनिर्मित ब्रॉड गेज सेक्शन पर ट्रेन परिचालन को रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने मंजूरी दे दी है। सफल निरीक्षण और स्पीड ट्रायल के बाद इस मार्ग पर 110 किमी प्रति घंटा की अधिकतम गति से ट्रेनों के संचालन की अनुमति दी गई है। एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा के मुताबिक यह सेक्शन 26.15 किमी लंबी मुरकंगसेलेक–पासीघाट नई रेल लाइन परियोजना का हिस्सा है, जो असम को अरुणाचल प्रदेश से सीधे जोड़ेगी।
परियोजना में सिल्ले, लाबो और पासीघाट सहित तीन नए स्टेशन तथा 27 बड़े पुल शामिल हैं। इसके पूरा होने से पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क का दायरा और व्यापक होगा। 29 मार्च 2014 को हारमती–नाहरलगुन लाइन के शुरू होने के साथ अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर राष्ट्रीय ब्रॉड गेज नेटवर्क से जुड़ी थी। अब यह नई परियोजना राज्य को और अधिक गहराई से राष्ट्रीय रेल मानचित्र से जोड़ने जा रही है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद रंगिया–मुरकंगसेलेक रूट और बोगीबील ब्रिज के माध्यम से पासीघाट तक लंबी दूरी की रेल सेवाओं का विस्तार संभव होगा। इससे न केवल यात्रा समय घटेगा, बल्कि परिवहन लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
ये भी पढ़ें:- AI Summit: 'मुझे नहीं पता था कि क्या करना चाहिए', डारियो अमोदेई का हाथ नहीं पड़कने पर सैम ऑल्टमैन, दी सफाई
मिलेगी और गति
-अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच तेज व भरोसेमंद रेल कनेक्टिविटी
-यात्रियों के लिए कम समय में सुरक्षित और सस्ती यात्रा
-माल ढुलाई की लागत में कमी, स्थानीय बाजारों को मजबूती
-छोटे उद्योगों और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा
-पर्यटन क्षेत्र को नई गति, पासीघाट बनेगा आकर्षण का केंद्र
-सीमावर्ती इलाकों में रणनीतिक और राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूती
-आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध और नियमित आपूर्ति
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पूर्वोत्तर के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा देगी। बेहतर रेल नेटवर्क से निवेश, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होगी, जिससे क्षेत्र राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में और सशक्त रूप से शामिल हो सकेगा।
ये भी पढ़ें:- Supreme Court: सीएए से जुड़े मामलों पर पांच मई से सुनवाई; स्टालिन के चुनाव को चुनौती मामले में फैसला सुरक्षित