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West Bengal: कई दिनों से रची जा रही थी हत्या की साजिश, जानिए चंद्रनाथ मर्डर केस में अब तक क्या-क्या खुलासे हुए

Thu, 07 May 2026 08:06 AM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक की हत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस को शक है कि इस वारदात की साजिश पिछले तीन-चार दिनों से रची जा रही थी और हमलावर लगातार उनकी गतिविधियों की रेकी कर रहे थे।
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शुभेंदु के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। शुरुआती जांच में पुलिस को शक है कि हत्या की साजिश पिछले तीन-चार दिनों से रची जा रही थी और हमलावर लगातार रथ की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। इस सनसनीखेज वारदात ने राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ हमला?

पुलिस और भाजपा नेताओं के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ अपनी सफेद स्कॉर्पियो एसयूवी से कहीं जा रहे थे। तभी बाइक सवार बदमाशों ने उनकी गाड़ी का पीछा करना शुरू किया। मध्यमग्राम के दोहारिया इलाके में पहुंचते ही हमलावरों ने एसयूवी को घेर लिया और बेहद करीब से ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।

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हमले में रथ को सीने और पेट में कई गोलियां लगीं। गाड़ी चला रहा ड्राइवर भी घायल हो गया। दोनों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने चंद्रनाथ रथ को मृत घोषित कर दिया। बाद में डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि गोलियां उनके दिल को चीरते हुए निकल गई थीं, जिसके कारण उनकी मौत हुई।

पेशेवर शूटरों की तरह किया गया हमला

जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमलावरों का निशाना सिर्फ चंद्रनाथ रथ थे। जिस सटीक तरीके से फायरिंग की गई, उससे साफ है कि हत्या को पेशेवर अपराधियों ने अंजाम दिया।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, रथ ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे थे और हमलावरों ने सीधे उन्हीं पर निशाना साधा। गोलियां इतनी सटीक थीं कि एसयूवी के फ्रंट ग्लास या बॉडी पर एक भी गोली नहीं लगी। ड्राइवर को सिर्फ इसलिए चोट लगी क्योंकि वह रथ के बेहद करीब था।

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पुलिस को शक है कि हमलावरों ने कई दिनों तक रथ की गतिविधियों की रेकी की थी। उनकी आवाजाही, रूट और समय की जानकारी जुटाने के बाद पूरी प्लानिंग के साथ हत्या को अंजाम दिया गया।

प्रत्यक्षदर्शी ने क्या बताया?

घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि हमला पूरी तरह प्री-प्लांड लग रहा था। उसके मुताबिक, रथ की गाड़ी उसकी कार को पार करके आगे निकली ही थी कि अचानक सड़क पर रुक गई। तभी एक बाइक सवार शख्स कार के बाईं तरफ पहुंचा और बेहद करीब से फायरिंग शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि हमलावर किसी प्रशिक्षित शूटर की तरह लग रहा था। उसने दो गोलियां चलाईं और तुरंत वहां से फरार हो गया। उसने बताया कि घटना रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच हुई और अस्पताल घटनास्थल से केवल 200-300 मीटर दूर था। गोलीबारी के बाद स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

संदिग्ध गाड़ी बरामद, नंबर प्लेट फर्जी निकली

घटना के बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी। जेसोर रोड और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों से भी पूछताछ की जा रही है।

पश्चिम बंगाल के डीजीपी सिद्धिनाथ गुप्ता देर रात अस्पताल पहुंचे और बताया कि पुलिस ने एक संदिग्ध चार पहिया वाहन जब्त किया है। वाहन की नंबर प्लेट से छेड़छाड़ की गई थी।

जांच में सामने आया कि वाहन पर लगा नंबर सिलीगुड़ी में रजिस्टर्ड एक दूसरी कार का है। पुलिस ने जब उस नंबर के असली मालिक विलियम जोसेफ से संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि उनकी कार सिलीगुड़ी स्थित घर के गैरेज में खड़ी है और वह मध्यमग्राम गई ही नहीं।

इसके बाद पुलिस को शक हुआ कि हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने के लिए फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया ताकि पहचान छिपाई जा सके।

कई एंगल से जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अब इस हत्या की जांच कई एंगल से कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ आपराधिक वारदात नहीं बल्कि इसके पीछे राजनीतिक दुश्मनी या चुनावी रंजिश भी हो सकती है।

सीमा से जुड़े थानों को भी अलर्ट कर दिया गया है ताकि हमलावर राज्य से बाहर न भाग सकें। पुलिस को आशंका है कि हत्या के बाद आरोपी बांग्लादेश सीमा या झारखंड की ओर भागने की कोशिश कर सकते हैं। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और बरामद कारतूसों की जांच के जरिए हमलावरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। 

विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली बड़ी जीत

यह घटना ऐसे समय हुई है जब हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की है। पार्टी ने 294 में से 207 सीटों पर जीत हासिल की। चंद्रनाथ रथ को शुभेंदु अधिकारी का बेहद भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों पर चुनाव प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई थी, जहां अधिकारी ने जीत दर्ज की थी। भवानीपुर सीट पर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को भी हराया था।

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