पवार ने कहा कि यह पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे और असामाजिक तत्वों को घुसपैठ करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में गड़बड़ी पैदा करने से रोकने के लिए कदम उठाए।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार गुरुवार को मुंबई के सह्याद्रि गेस्ट हाउस में भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग के समक्ष पेश हुए। उन्होंने अपने बयान में कार्यकर्ताओं के खिलाफ भादंवि की धारा 124 ए (देशद्रोह) लगाने की पुलिस कार्रवाई की निंदा की।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार ने कहा कि देशद्रोह जैसे उपाय निजी स्वतंत्रता का हनन करते हैं। शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से असहमति प्रकट करने का हक छीनते हैं। न्यायिक जांच आयोग के समक्ष बोलते हुए, पवार ने कहा, 'भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (देशद्रोह) स्वतंत्रता को दबाने और शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई असहमति की किसी भी आवाज को दबाने के लिए लागू की जाती है। मैं राज्यसभा सदस्य के रूप में इस मुद्दे को संसद जैसे उपयुक्त मंच पर उठाने का वादा करता हूं।'
पवार ने कहा कि यह पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे और असामाजिक तत्वों को घुसपैठ करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में गड़बड़ी पैदा करने से रोकने के लिए कदम उठाए। पवार ने कहा कि जब भी कोई राजनीतिक नेता लोगों को संबोधित करता है तो उसे आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए। नेता के भाषण या भाषण में भड़काऊ बातें नहीं होना चाहिए। यदि कोई नेता ऐसे भाषण देता है तो उसे उसके अंजाम के लिए तैयार रहना चाहिए।
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बता दें, 1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ के दिन, लाखों लोगों ने पुणे के बाहरी इलाके भीमा कोरेगांव गांव की यात्रा की थी। जब लोग रास्ते में थे, तब हिंसा भड़क उठी, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे। महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक दो प्रमुख नेता मिलिंद एकबोटे और मनोहर उर्फ संभाजी भिड़े कथित तौर पर हमले के मास्टरमाइंड थे।