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मुंबई के रेस्टोरेंट ने 10 रुपये महंगी बेची थी आइसक्रीम, अब लगा दो लाख का जुर्माना

Thu, 27 Aug 2020 04:08 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मुंबई में स्थित शगुन वेज रेस्टोरेंट ने छह साल पहले एक ग्राहक को आइसक्रीम का एक पैकेट 10 रुपये महंगा बेचा था। अब जिला उपभोक्ता फोरम ने इसे अनुचित व्यापार करार दिया है और रेस्टोरेंट पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही फोरम ने रेस्टोरेंट से ग्राहक को मुआवजा देने को भी कहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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फोरम ने कहा कि रेस्टोरेंट करीब 24 साल से यहां है और रोजाना 40 से 50 हजार रुपये कमा रहा है। ऐसे में निश्चित तौर पर ग्राहकों से वस्तुओं की अधिकतम बिक्री मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत वसूल कर इसने लाभ कमाया है। जिला फोरम ने रेस्टोरेंट को दो लाख रुपये अतिरिक्त जमा करने का भी आदेश दिया और कहा कि ग्राहकों के हित के लिए रेस्टोरेंट और दुकानों द्वारा इस तरह की बेईमानी और धोखाधड़ी करके व्यापार करना ठीक नहीं है।

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बता दें कि रेस्टोरेंट ने पुलिस सब इंस्पेक्टर भास्कर जाधव ने एक आइसक्रीम के फैमिली पैक के लिए 175 रुपये लिए थे। इस पैकेट की एमआरपी 165 रुपए थी। मामला साल 2015 का है। जाधव ने इसे लेकर दक्षिण मुंबई जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में जाधव ने बताया था कि आठ जून 2014 को वह डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन से घर जाते हुए घर आए मेहमानों के लिए आइसक्रीम लेने के लिए रुके थे। 


जाधव ने फोरम को बताया कि उन्होंने एक की कीमत में दो फैमिली पैक लिए थे, लेकिन बिल में अतिरिक्त कीमत देख हैरान हो गए। उन्होंने रेस्टोरेंट से इसे लेकर बात की थी लेकिन उनकी बात सुनी नहीं गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने  आइसक्रीम काउंटर से खरीदी थी और वह रेस्टोरेंट के अंदर भी नहीं गए थे। जाधव ने वह बिल भी प्रस्तुत किया जो बताता है कि उन्होंने काउंटर से ही आइसक्रीम खरीदी थी और रेस्टोरेंट के अंदर नहीं गए थे। 
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वहीं, रेस्टोरेंट ने कहा कि उसने आइसक्रीम को स्टोर करने के एवज में कीमत बढ़ाई थी। रेस्टोरेंट ने ये भी कहा कि दुकान और रेस्टोरेंट में अंतर होता है। जिला फोरम ने रेस्टोरेंट के दावे को मानने से इनकार करते हए कहा कि जाधव ने रेस्टोरेंट की किसी भी सेवा का लाभ नहीं लिया। फोरम ने कहा कि जाधव ने रेस्टोरेंट के वेटर से पानी मंगाने, फर्नीचर का इस्तेमाल करने, पंखे या एसी का इस्तेमाल करने जैसी कोई सेवा नहीं ली। इसलिए अतिरिक्त कीमत लेना अनुचित था।  

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