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MSC Bank Scam: मुंबई पुलिस ने की केस बंद करने की सिफारिश, डिप्टी सीएम अजित पवार हैं आरोपी

Fri, 01 Mar 2024 09:27 PM IST
गुलाम अहमद पीटीआई, मुंबई

सार

विशेष लोक अभियोजक राजा ठाकरे ने मंबई के एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश आरएन रोकाडे के समक्ष सी समरी रिपोर्ट (C Summary) दाखिल की है। इस पर अदालत 15 मार्च को सुनवाई करेगी।  
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अजित पवार (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने शुक्रवार को महाराष्ट्र राज्य सहकारी (एमएससी) बैंक घोटाले से संबंधित मुकदमे को बंद करने की सिफारिश की है। 25 हजार करोड़ रुपये के इस कथित बैंक घोटाले में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी नेता अजित पवार भी आरोपियों में शामिल हैं।

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विशेष लोक अभियोजक (सरकारी वकील) राजा ठाकरे ने मंबई के एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश आरएन रोकाडे के समक्ष सी समरी रिपोर्ट (C Summary) दाखिल की है। इस पर अदालत 15 मार्च को सुनवाई करेगी। अब यह अदालत पर निर्भर करता है कि वह लोक अभियोजक की सिफारिश को स्वीकार करे अथवा जांच जारी रखते हुए आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दे।

पुलिस सी समरी रिपोर्ट तब दाखिल करती है, जब कोई आपराधिक मामला तथ्यों की चूक से दाखिल हो जाता है अथवा जांच के दौरान मुकदमे की प्रकृति आपराधिक नहीं पाई जाती है।
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आर्थिक अपराध शाखा ने पहली क्लोजर रिपोर्ट सितंबर 2020 में दाखिल की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। लेकिन, अक्तूबर 2022 में आर्थिक अपराध शाखा ने अदालत को बताया था कि उसने शिकायतकर्ता और प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से उठाए गए बिंदुओं के आधार पर जांच जारी रखा है। आर्थिक अपराध शाखा ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर अगस्त 2019 में धोखाधड़ी समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

70 से अधिक लोगों को बनाया गया था आरोपी
यह लोन घोटाला महाराष्ट्र में चीनी सहकारी समितियों, कताई मिलों और अन्य संस्थाओं द्वारा जिला और सहकारी बैंकों से लिए गए हजारों करोड़ रुपये के ऋण से संबंधित है। पुलिस की एफआईआर में शरद पवार के भतीजे अजित पवार और 70 से अधिक अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है, जो अनियमितताओं के दौरान एमएससी बैंक के निदेशक थे।

बैंक में अनियमितताओं के कारण 25,000 करोड़ का हुआ नुकसान
एफआईआर में कहा गया है कि बैंक में अनियमितताओं के कारण 1 जनवरी 2007 से 31 दिसंबर 2017 के बीच राज्य के खजाने को 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ईओडब्ल्यू ने आरोप लगाया था कि चीनी मिलों को बहुत कम दरों पर ऋण जारी करने और दिवालिया घोषित व्यवसायों की संपत्तियों को औने-पौने दामों पर बेचने में बैंकिंग और भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों का उल्लंघन किया गया।
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