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Mumbai Bus Strike: 'बेस्ट' के निजी बस चालकों ने सात दिनों बाद वापस ली हड़ताल, सीएम एकनाथ शिंदे ने मानी मांगे

Tue, 08 Aug 2023 05:44 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मुंबई में सार्वजनिक निकाय बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन (बेस्ट) द्वारा नियुक्त निजी बस चालकों ने मंगलवार को सात दिनों के बाद अपनी हड़ताल वापस ले ली।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मुंबई में सार्वजनिक निकाय बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन (बेस्ट) द्वारा नियुक्त निजी बस चालकों ने मंगलवार को सात दिनों के बाद अपनी हड़ताल वापस ले ली। निजी बस ऑपरेटरों के ड्राइवरों ने दावा किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें उनकी वेतन वृद्धि और अन्य मांगें मान ली हैं और उनको पूरा करने का आश्वासन दिया है।

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सीएम शिंदे ने मांगी चालकों की मांगें
इन संविदा ड्राइवरों के हड़ताल वापस होने के बाद  लाखों बस यात्रियों को राहत मिलेगी, हड़ताल से 500 से ज्यादा बसें सड़कों पर नहीं थीं, जिस कारण यात्रियों को काफी परेशानियो का सामना करना पड़ रहा था। संविदा कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि ने आजाद मैदान में मीडिया को बताया कि उनका प्रतिनिधिमंडल सोमवार आधी रात के बाद सीएम शिंदे से मिला। प्रतिनिधि ने कहा कि शिंदे ने आश्वासन दिया कि आंदोलनकारी कर्मचारियों की मांगें पूरी की जाएंगी।

निजी बस ऑपरेटरों के कर्मचारियों के एक समूह के समन्वयक विकास खरमाले ने कहा कि मुख्यमंत्री ने वेतन वृद्धि, बोनस, छुट्टियों और मुफ्त बस यात्रा के बारे में हमारी प्राथमिक मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। इसलिए हड़ताल वापस ले ली गई है। निजी बस ऑपरेटरों के ड्राइवर समेत कर्मचारी वेतन वृद्धि और बेस्ट कर्मचारियों के बराबर वेतन देने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
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बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (बेस्ट) उपक्रम मुंबई और पड़ोसी क्षेत्रों में सार्वजनिक बस सेवाएं प्रदान करता है। बेस्ट ने सात ठेकेदारों से वेट लीज मॉडल पर 1,600 से अधिक बसें किराए पर ली हैं, जिसके तहत वाहन का स्वामित्व, रखरखाव, ईंधन और ड्राइवर की लागत निजी ऑपरेटर की जिम्मेदारी है। सार्वजनिक परिवहन निकाय अपने 3,100 से अधिक बसों के बेड़े के साथ मुंबई और पड़ोसी ठाणे, नवी मुंबई और मीरा-भायंदर शहरों में 30 लाख से अधिक यात्रियों को अपनी बसों से ले जाता है, जिनमें सार्वजनिक परिवहन निकाय के पास 1,400 से भी कम बसें हैं।

सीएम ने वेतन वृद्धि, दिवाली बोनस जैसी मांगे मानी
विकास खरमाले ने बताया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे वेतन वृद्धि, साप्ताहिक अवकाश, वार्षिक वेतन अवकाश, दिवाली बोनस और अन्य मांगों पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सीएम ने उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि विरोध करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ न तो कोई कार्रवाई की जाएगी और न ही उन दिनों का वेतन काटा जाएगा। साथ ही बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें नियमित बेस्ट कर्मचारियों की तरह मुफ्त बस पास सुविधा देने का भी आश्वासन दिया। 

खरमाले ने कहा कि सीएम ने बेस्ट उपक्रम में स्थायी नौकरियों की उनकी मुख्य मांग पर बातचीत के बाद कोई रास्ता निकालने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि इसलिए हमने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। हम सभी कर्मचारियों से अपने-अपने डिपो में फिर से ड्यूटी पर लौटने की अपील करते हैं। साथ ही बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि वह व्यक्तिगत रूप से श्रम आयुक्त के साथ बैठक करेंगे और मंगलवार को ही समाधान निकालेंगे। निजी बस ऑपरेटरों के कर्मचारियों के मुताबिक, शिंदे के निर्देश पर ठाणे के पूर्व मेयर नरेश म्हस्के ने पहले उनकी मांगें सुनीं और फिर उन्हें सोमवार रात सीएम के साथ बैठक के लिए बुलाया।

प्रभावित बेस्ट बस सेवाएं अगले 24 से 48 घंटों में बहाल कर दी जाएंगी
बेस्ट के सूत्रों ने कहा कि अगर राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बावजूद निजी बस ऑपरेटरों के कर्मचारी हड़ताल पर अड़े रहे तो सार्वजनिक परिवहन निकाय यात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम कर रहा था। उन्होंने आगे कहा कि बेस्ट की मांग और राज्य सरकार के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए, महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम ने 300 से अधिक बसों की उनकी मांग के मुकाबले मंगलवार सुबह 200 से अधिक बसें प्रदान कीं। विशेष रूप से, मुंबई के संरक्षक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने सोमवार को कहा कि प्रभावित बेस्ट बस सेवाएं अगले 24 से 48 घंटों में बहाल कर दी जाएंगी।

कुछ यात्रियों ने की शिकायतें
हड़ताल के कारण यात्रियों को कठिन समय का सामना करना पड़ रहा है। जैसे-जैसे सड़कों पर चलने वाली बसों की संख्या कम हो गई है, सेवा आवृत्ति प्रभावित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप जो बसें चल रही हैं उनमें अत्यधिक भीड़ है। कुछ यात्रियों ने यह भी शिकायत की कि उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए ऑटो-रिक्शा और टैक्सी लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

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