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Gujarat High Court: कोर्ट ने विमान हाईजैक मामले में आरोपी व्यक्ति को किया बरी, काट रहा था उम्रकैद कैद की सजा

Tue, 08 Aug 2023 05:06 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को विमान हाईजैक मामले में विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत द्वारा जारी सजा आदेश को रद्द कर दिया और मुंबई के व्यवसायी बिरजू सल्ला को बरी कर दिया।
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gujarat high court - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को विमान हाईजैक मामले में विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत द्वारा जारी सजा आदेश को रद्द कर दिया और मुंबई के व्यवसायी बिरजू सल्ला को बरी कर दिया। एनआईए अदालत ने विमान हाईजैक मामले में बिरजू सल्ला को दोषी पाया था और अपहरण विरोधी कानून के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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2017 में मुंबई-दिल्ली फ्लाइट के शौचालय में धमकी भरा नोट रखने की कथित शरारत के लिए सल्ला ने सात साल सलाखों के पीछे बिताए। व्यवसायी बिरजू सल्ला पहले व्यक्ति थे जिन पर कड़े अपहरण रोधी अधिनियम, 2016 के तहत मामला दर्ज किया गया था। एनआईए ने उसके खिलाफ अपहरण रोधी अधिनियम, 2016 की धारा 3(1), 3(2)(ए) और 4(बी) के तहत आरोप पत्र दायर किया था। 

पांच करोड़ का जुर्माना भी किया रद्द
हाईकोर्ट जस्टिस एएस सुपेहिया और एमआर मेंगडे की खंडपीठ ने कहा कि अपीलकर्ता सल्ला को अधिनियम की धारा 3(1) और 3(2)(ए) के तहत अपराधों से बरी किया जाता है। इसमें कहा गया है कि अगली कड़ी के रूप में अधिनियम की धारा 4 (बी) के तहत सजा को रद्द कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सल्ला को पांच करोड़ रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया गया था, इस बारे में अदालत ने कि यदि उसने जुर्माने का पहले ही भुगतान कर दिया हो तो उसे सल्ला को वापस कर दिया जाए।
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पत्र में लिखा था विमान को सीधे पीओके ले जाया जाएगा
सल्ला ने पत्र में लिखा था कि विमान में अपहरणकर्ता सवार हैं और विमान को सीधे पीओके ले जाया जाएगा और चेतावनी देते कहा कि यदि विमान को कहीं और उतारने का प्रयास किया गया तो लोग मर जाएंगे और कहा कि कार्गो क्षेत्र में एक बम लगाया गया है। इसके बाद फ्लाइट को अहमदाबाद में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी, जहां सल्ला पर उसकी शरारत के लिए मामला दर्ज किया गया। 

प्रेमिका के लिए की थी यह हरकत
गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि सल्ला की हरकत अपनी प्रेमिका को प्रभावित करने के लिए थी जो जेट एयरवेज में कार्यरत थी और दिल्ली में रह रही थी। सल्ला का उद्देश्य एयरलाइन को प्रभावित करना था ताकि वह अपनी प्रेमिका के साथ मुंबई लौट आए। 

हालाँकि, सल्ला के पत्र के पीछे के मकसद के बारे में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से मुकदमे के दौरान कोई चर्चा नहीं की गई। विशेष एनआईए अदालत ने कहा कि सल्ला के अपराध को दर्ज करने के लिए पर्याप्त सबूत थे और उसे आजीवन कारावास की सजा दी, क्योंकि यह संशोधित अपहरण विरोधी कानून में निर्धारित न्यूनतम सजा है।

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