वेणुगोपाल का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है। उन्होंने पांच साल तक केंद्र के शीर्ष कानून अधिकारी के रूप में कार्य किया। केंद्र सरकार ने 67 वर्षीय मुकुल रोहतगी को फिर से अटॉर्नी जनरल बनने का प्रस्ताव दिया लेकिन उन्हें इसे अस्वीकार कर दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता मकुल रोहतगी ने अटॉर्नी जनरल के रूप में लौटने के सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। सूत्रों ने यह जनाकारी दी। रोहतगी ने जून 2017 में अटॉर्नी जनरल के रूप में पद छोड़ दिया था। केके वेणुगोपाल ने उनका स्थान लिया था।
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वेणुगोपाल का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है। उन्होंने पांच साल तक केंद्र के शीर्ष कानून अधिकारी के रूप में कार्य किया। केंद्र सरकार ने 67 वर्षीय मुकुल रोहतगी को फिर से अटॉर्नी जनरल बनने का प्रस्ताव दिया लेकिन उन्हें इसे अस्वीकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, उनका दूसरा कार्यकाल 1 अक्टूबर से शुरू होना था।
वेणुगोपाल का 2020 में अटॉर्नी जनरल के रूप में कार्यकाल समाप्त होना था। उन्होंने केंद्र सरकार से उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया। हालांकि सरकार ने उन्हें एक और कार्यकाल तक जारी रहने के लिए कहा था। लेकिन वह दो साल तक के लिए ही रहेंगे।
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मुकुल रोहतगी को एक अनुभवी वकील माना जाता है। गुजरात दंगों के मामले में उन्होंने राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व किया था। इसके अलावा देश की सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में कई हाईप्रोफाइल मामलों में पेश हुए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से जुड़े मामले में भी दलील दी थी।