MUDA Case: लोकायुक्त अधिकारियों ने शुक्रवार को मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) के उन 14 भूखंडों का निरीक्षण किया जिन्हें कथित तौर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती बी.एम को अवैध तरीके आवंटित किया गया था।
लोकायुक्त अधिकारियों ने शुक्रवार को मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) के उन 14 भूखंडों का निरीक्षण किया जिन्हें कथित तौर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती बी.एम को अवैध तरीके आवंटित किया गया था। अधिकारियों ने यह निरीक्षण मुडा और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर किया।
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अधिकारियों ने मुडा के इन भूखंडों का माप लिया। इस प्रक्रिया के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा भी मौजूद थे, जिन्हें लोकायुक्त ने बुलाया था। कृष्णा ने पत्रकारों से कहा, मुझे आज 14 स्थलों के निरीक्षण के लिए लोकायुक्त ने बुलाया था। 27 सितंबर को लोकायुक्त पुलिस ने सिद्धारमैया, उनकी पत्नी, उनके साले मल्लिकार्जुन स्वामी, देवराजु (जिनसे मल्लिकार्जुन स्वामी ने जमीन खरीदी और उन्हें उपहार में दी) और अन्य के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की थी। यह प्राथमिकी एक विशेष अदालत के 25 सितंबर के आदेश के बाद दर्ज की गई थी। इससे एक दिन पहल उच्च न्यायालय ने सिद्धारमैया के खिलाफ जांच के लिए राज्यपाल थावरचंद गहलोत की मंजूरी बरकरार रखा था। प्रवर्तन निदेशालय ने भी मुडा मामले में एक ईएसआईआर दर्ज की है, जो पुलिस की एफआईआर के समान है।
मुडा मामले पर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा, भाजपा ने मुडा मामले को राजनीतिक रूप से भुनाने का प्रयास किया है। अगर आप नियमों के अनुसार चलें, तो सभी मामलों में मूल निर्णय सर्वोच्च न्यायालय से आते हैं। सरकार ने जांच के लिए अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग किया है। यह ध्यान देने योग्य बात है कि ये सभी लेनदेन तब हुई, जब राज्य में भाजपा की सरकार थी।
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उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस मामले को तूल दे रही है और इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। मोइली ने स्पष्ट कहा कि उनका मानना है कि सभी नियमों का प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए और जांच का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए।