मध्यप्रदेश में 17 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव के बाद अब तमाम राजनीतिक दलों की निगाहें 3 दिसंबर को होने वाली मतगणना पर आकर टिक गई हैं। कांग्रेस के बाद अब भाजपा ने भी इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। मंगलवार को दिग्गजों के मंथन के बाद अब भाजपा काउंटिंग टेबल के लिए एजेंटों की तैनाती में जुटी है।
17 नवंबर को हुए मतदान के बाद अब तीन दिसंबर को मतगणना होगी। मतगणना को लेकर प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दल भाजपा-कांग्रेस सहित सपा, बसपा, आप और अन्य दलों द्वारा मतगणना की प्लानिंग बनाई जा रही है। मतों की गणना को लेकर भाजपा ने मंगलवार की शाम को भाजपा मुख्यालय भोपाल में विशेष बैठक आयोजित की। इस बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और चुनाव अभियान प्रभारी नरेंद्र सिंह तोमर शामिल हुए। सभी नेताओं ने मतगणना की तैयारियों की समीक्षा की।
मतगणना को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों द्वारा काउंटिंग एजेंट्स की विशेष पाठशाला लगाई जा रही है। भाजपा ने तय किया है कि विधानसभा और जिला स्तर पर काउंटिंग एजेंटों को ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें सिखाया जाएगा कि मतगणना के समय पूरी तरह मुस्तैद रहें। किसी भी गड़बड़ी की आशंका पर आपत्ति जताएं। एजेंट्स को यह भी सीख दी जाएगी कि किसी भी सूरत में किसी दबाव में न आएं।
कांग्रेस ने भी कसी कमर
इधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी अपने सभी 230 प्रत्याशियों को 26 नवंबर को राजधानी भोपाल बुलाया है। इसी दिन सभी प्रत्याशियों को मतगणना को लेकर विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ट्रेनिंग में कमलनाथ और उनकी चुनावी टीम मतगणना के दौरान होने वालीं गड़बड़ियों पर नजर रखने को लेकर ट्रेनिंग देगी। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
काउंटिंग के लिए 14 टेबल
प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की मतगणना के लिए 14-14 टेबल लगेंगी। जहां उम्मीदवारों की संख्या कम होगी, वहां के परिणाम पहले सामने आएंगे। प्रक्रिया की जानकारी, मतपत्रों की गिनती, चक्रवार परिणाम की घोषणा होने के बाद ही आगे बढ़ने, परिणाम की घोषणा की सत्यापित प्रतिलिपि लेने और संदेह होने पर आपत्ति की प्रक्रिया के बारे में बताया जाएगा। इसके लिए मतगणना संबंधी दिशा निर्देश तैयार करके दिए जाएंगे। ईवीएम जब मतगणना स्थल पर लाई जाएंगी और जब मतों की गणना शुरू होगी, तो मशीन की सील कैसे चेक करनी है, यदि कोई संदेह होता है तो उसकी शिकायत कैसे करनी है, फार्म सी के माध्यम से मतदान की जो जानकारी मिली है, उससे मतों का मिलान कैसे करना है, इसके बारे में बताया जाएगा।
सांसद मंत्री और विधायक नहीं बन सकते मतगणना एजेंट
कोई भी उम्मीदवार मंत्री, सांसद और विधायकों को मतगणना अभिकर्ता नहीं बनाया जा सकता है। उम्मीदवार के साथ दो अभिकर्ताओं को मतगणना केंद्र पर प्रवेश की अनुमति रहेगी। सहकारी संस्थान, निगम, मंडल, आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष को भी मतगणना स्थल के अंदर जाने की अनुमति नहीं रहेगी। वेबकास्टिंग की व्यवस्था मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा की जा रही है। तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना को कार्य संपन्न कराया जाएगा।