2018 से अब तक सरकार द्वारा संचालित गोद लेने वाली विशेष एजेंसियों में 800 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से ज्यादातर बच्चे दो साल से कम उम्र के थे।
मौत का मुख्य कारण, बच्चों को असुरक्षित ढंग से छोड़ना बताया गया। इस तरह छोड़े गए कई बच्चों को कुत्तों ने काटा हुआ था और कुछ इतनी बुरी हालत में थे कि उन्हें बचाया नहीं जा सका। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) से मिले आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित एजेंसियों में 2021-22 के दौरान 118 बच्चों की मौत हुई।
अधिकतर बच्चों की उम्र दो साल से कम
इनमें से 104 बच्चों की उम्र दो साल से कम थी। 2020-21 में यह आंकड़ा 169 था, जबकि 2019-20 में यह संख्या 281 थी। इसके अनुसार, 2018-19 में सरकारी दत्तक ग्रहण एजेंसियों में 251 बच्चों की मौत हुई थी। कुल 819 बच्चों में 481 लड़कियां व 129 दिव्यांग बच्चे थे।
n असली कारण जानने की जरूरत : बाल अधिकार कार्यकर्ता एनाक्षी गांगुली ने कहा कि संख्याओं से परे प्रत्येक मामले में ये देखने की जरूरत है कि ये मौतें कैसे और क्यों हुईं। उन्होंने कहा, उन्हें लगता है कि इस विषय पर सरकार की ओर से काफी पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है।