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मानसून सत्र : नौ दिन में आठ घंटे ही चली राज्यसभा, 33 घंटे हंगामे में हुए बर्बाद

Sat, 31 Jul 2021 03:22 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली

सार

  • पेगासस जासूसी पर विपक्ष के हंगामे के कारण सदन के 33.8 घंटे बर्बाद हुए
  • बीते दो दिनों में सिर्फ तीन विधेयक ही हो सके पारित
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राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा - फोटो : ANI
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विस्तार
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संसद के पिछले सत्रों में रिकॉर्ड बनाने वाले उच्च सदन में मानसून सत्र के नौ दिनों में अब तक महज 8.2 घंटे ही राज्यसभा चली। पेगासस जासूसी पर चर्चा की मांग पर अड़े विपक्ष के हंगामे के कारण सदन के 33.8 घंटे बर्बाद हुए हैं। तमाम कवायद के बावजूद शुक्रवार को भी सदन को सोमवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इसके चलते सरकार को 26.925 करोड़ की चपत लगी है।

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शोर शराबे के बीच सिर्फ तीन विधेयक ही हो सके पारित
सरकार के प्रयास और सभापति की तमाम कवायद के बाद बीते दो दिनों से प्रश्नकाल और शून्य काल हंगामे के बीच चलने शुरू हुए। मंत्रियों ने इस दौरान अन्य सदस्यों के जवाब भी दिए। उच्च सदन में अभी तक केवल कोरोना संक्रमण को लेकर एक अल्पकालिक चर्चा हो सकी है।

इसके अलावा नौवहन समुद्री सहायता विधेयक 2021, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक 2021 और फैक्टरिंग विनियमन संशोधन विधेयक 2021 पारित हो पाया है।
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बता दें कि सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र के तीसरे सप्ताह में सरकार का एजेंडा अध्यादेश से जुड़े विधेयक होंगे। बीते दो सप्ताह में अध्यादेश से जुड़े छह विधेयकों में से महज एक को ही दोनों सदनों की मंजूरी मिलने से सरकार की चिंता बढ़ गई है।

अगले सप्ताह राज्यसभा में ऐसे विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार रणनीति बनाने में जुट गई है। विपक्ष के पुराने तेवर बरकरार रहने पर सरकार हंगामे के बीच ही इन विधेयकों को पारित करा सकती है।

सरकार को अब तक आवश्यक सेवा रक्षा विधेयक को ही दोनों सदनों में पारित कराने में सफलता हासिल हुई है। लोकसभा में इस विधेयक के साथ दिवाला-दिवालियापन संहिता संशोधन विधेयक को मंजूरी मिली है।

जबकि शुक्रवार को सरकार ने अध्यादेश से जुड़े राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास में वायु गुणवत्ता प्रबंध के लिए आयोग विधेयक को पेश किया है। इस हिसाब से सरकार को अब राज्यसभा में अध्यादेश से जुड़े पांच तो लोकसभा में चार विधेयकों को पारित कराना है।

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