लंबी अवधि के औसत (एलपीए) के 94 फीसदी से 106 फीसदी के बीच बारिश को 'सामान्य' माना जाता है। हालांकि, मानसून के मौसम के दौरान देश में 'सामान्य संचयी बारिश' का मतलब वर्षा का स्थानिक और अस्थायी प्रसार भी नहीं है। भारतीय मानसून विभिन्न प्राकृतिक कारकों की वजह से समय के साथ होने वाले अंतर्निहित उतार-चढ़ाव और बदलावों को संदर्भित करता है। इसे प्राकृतिक परिवर्तनशीलता कहा जाता है।
हालांकि, शोध से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन मानसून को ज्यादा परिवर्तनशील बना रहा है। बढ़ी हुई परिवर्तनशीलता का मतलब अधिक चरम और शुष्क मौसम अवधि है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि 2023 का मानसून अल नीनो के प्रभाव का मुकाबला करने वाले सकारात्मक कारकों के साथ 94.4 फीसदी संचयी बारिश के साथ समाप्त हुआ, जिसे 'सामान्य' माना जाता है।
महापात्रा ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उपमंडलीय इलाके के 73 फीसदी हिस्से में सामान्य बारिश दर्ज की गई। 18 फीसदी कम बारिश देखी गई। आईएमडी ने कहा कि पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 1,367.3 मिमी के मुकाबले 1,115 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 18 प्रतिशत की कमी को दिखाता है।
उत्तर-पश्चिम भारत में 593 मिमी के मुकाबले 587.6 मिली बारिश दर्ज की गई। मध्य भारत जहां कृषि मुख्य रूप से मानसून की बारिश पर निर्भर करती है, वहां सामान्य बारिश 981.7 मिमी के मुकाबले 978 मिमी दर्ज की गई। दक्षिण प्रायद्वीप में आठ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। मानसून से पहले ब्रीफिंग में आईएमडी ने भारत में मानसून के सामान्य रहने का अनुमान जताया था। हालांकि, इसने चेतावनी दी थी कि अल नीनो दक्षिण पश्चिम मानसून के उत्तरार्ध को प्रभावित कर सकता है। अल नीनो की स्थिति भारत में कमजोर मानसूनी हवाओं और शुष्क परिस्थितियों से जुड़ी हुई है।
आईएमडी के महानिदेशक ने कहा कि पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों को छोड़कर भारत के बड़े हिस्से में न्यूनतम तापमान 'सामान्य से अधिक' रहने का अनुमान है। उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश सामान्य रहने का अनुमान है। महापात्रा ने बताया कि अक्तूबर से दिसंबर की अवधि में उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र के हिस्सों में 'सामान्य से अधिक बारिश' रहने की संभावना है।