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Manipur Violence: 'राज्य सरकार की विफलता से नाराज हैं लोग', मणिपुर भाजपा के नेताओं ने नड्डा को लिखा खत

Sat, 30 Sep 2023 05:59 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल

सार

पत्र में कहा गया है कि जनता का आक्रोश और विरोध अब धीरे-धीरे स्थिति बदल रहा है, जिससे लंबे समय से जारी इस अशांति का एकमात्र दोष स्थिति से निपटने में सरकारी विफलता को ठहराया जा रहा है। 
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जेपी नड्डा - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मणिपुर इकाई ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि है कि राज्य सरकार जातीय संघर्ष को रोकने में अब तक विफल रही है, जिससे लोग नाराज हैं। 

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'हालात बदल रहा जनता का आक्रोश'
पत्र में पार्टी की राज्य इकाई कीप्रमुख शारदा देवी, उपाध्यक्ष चिदानंद सिंह और छह अन्य लोगों के हस्ताक्षर हैं। इसमें कहा गया है कि जनता का आक्रोश और विरोध अब धीरे-धीरे स्थिति बदल रहा है, जिससे लंबे समय से जारी इस अशांति का एकमात्र दोष स्थिति से निपटने में सरकारी विफलता को ठहराया जा रहा है। 

'विस्थापितों को फिर से बसाने की मांग'
इन नेताओं ने विस्थापित लोगों को उनके मूल निवास स्थानों पर तत्काल फिर से बसाने की मांग की है। पत्र में उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि हमारी सरकार राज्य में सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए दिन-रात काम कर रही है। राज्य स्तर पर हमारी पार्टी भी नए घटनाक्रमों से निपटने में एक प्रमुख महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 

'मृतकों के परिवारों को मिले अनुग्रह राशि'
इसमें यह भी मांग की गई है कि आम लोगों के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात के मुक्त प्रवाह को तत्काल बहाल किया जाना चाहिए। राज्य इकाई ने उन लोगों को मुआवजा देने का भी आह्वान किया जिनके घर नष्ट हो गए। उन्होंने कहा कि जातीय संघर्ष में मारे गए लोगों के परिवारों को अनुग्रह राशि दी जानी चाहिए। पत्र में नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और किसी भी नियम के उल्लंघन को आतंकवाद के कृत्य के रूप में मानने का भी आग्रह किया गया।
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'जल्द पूरा हो बायोमेट्रिक डाटा रिकॉर्ड अभियान'
राज्य इकाई ने नड्डा से अवैध प्रवासियों के बायोमेट्रिक डाटा को रिकॉर्ड करने के अभियान को जल्द पूरा करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को अवगत कराने का भी आग्रह किया, ताकि एनआरसी के जल्द क्रियान्वयन की सुविधा मिल सके और सभी अफीम की खेती को पूरी तरह से नष्ट किया जा सके और निरंतर निगरानी के लिए एक संयुक्त निगरानी समिति का गठन किया जा सके।

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