दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने कहा कि हवा की गुणवत्ता केवल एक दिन में ही खराब नहीं हुई है। यह कानून को लागू करने में लगातार अनदेखी का नतीजा है। इसके साथ ही एनजीटी ने कचरा जलाने पर अंकुश लगाने के लिए प्राधिकरणों को ड्रोन का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है।
एनजीटी ने कहा, कूड़ा जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कर्मियों की कमी को लेकर भी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि राजधानी में इस काम के लिए 5000 स्वच्छता इंस्पेक्टर की तुलना में केवल 50 ही उपलब्ध हैं। अगर निगमों के पास कर्मचारियों की कमी है तो बेरोजगार युवकों और सिविल डिफेंस समूहों की भर्ती करनी चाहिए। उनकी सेवाओं के बदलने उन्हें एक निश्चित रकम का भुगतान करना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली और एनसीआर में वायु की गुणवत्ता गंभीर और बेहद खराब स्थिति में पहुंचने पर समीक्षा की। उन्होंने मंगलवार को इस बाबत एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए उत्तर भारत में प्रदूषण के हालात पर चर्चा की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ट्वीट के जरिये इसकी जानकारी दी। बैठक में प्रधानमंत्री ने पश्चिम भारत में चक्रवात से उत्पन्न हालात की भी समीक्षा की। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से बिगड़े हालात के बाद प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के शीर्ष अधिकारियों के साथ रविवार और सोमवार को लगातार समीक्षा बैठकें कीं।