बॉम्बे हाइकोर्ट ने मंगलवार को राकांपा नेता अनिल देशमुख के पूर्व निजी सचिव संजीव पलांडे को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जमानत दे दी। मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है। न्यायमूर्ति एनजे जमादार की एकल पीठ ने पलांडे को जमानत दे दी, जो जून 2021 में ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से जेल में है। हालांकि, पलांडे जेल से बाहर नहीं निकल पाएंगे, क्योंकि वह केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांचे जा रहे भ्रष्टाचार के एक मामले का भी सामना कर रहे हैं।
ईडी ने हाईकोर्ट से जमानत देने के उसके आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस साल अक्तूबर में ईडी के मामले में देशमुख को जमानत दी थी। ईडी का आरोप मुख्य रूप से देशमुख के इर्द-गिर्द घूमता है, जो मुंबई के पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे से विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों से पैसे वसूलने के लिए कहता है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, पलांडे ने देशमुख की ओर से वाजे को पैसे वसूलने के निर्देश दिए थे।
महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में गृह मंत्री रहे देशमुख, पलांडे और अन्य के खिलाफ ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग का मामला तब आया, जब सीबीआई ने उन्हें मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह द्वारा लगाए गए जबरन वसूली के आरोपों से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज किया।
ईडी ने दावा किया था कि देशमुख ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और मुंबई के विभिन्न बारों से 4.70 करोड़ रुपये एकत्र किए। देशमुख परिवार द्वारा नियंत्रित एक शैक्षिक ट्रस्ट, नागपुर स्थित श्री साईं शिक्षण संस्थान को मनी लॉन्ड्रिंग की गई थी।
सीबीआई ने उच्च न्यायालय का रुख किया
सीबीआई ने भ्रष्टाचार के एक मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को जमानत देने के आदेश पर रोक को तीन जनवरी तक बढ़ाने के लिये मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया। उच्च न्यायालय ने कहा कि वह सीबीआई की अर्जी पर बुधवार को सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की एकल पीठ ने 12 दिसंबर को मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता देशमुख (73) को जमानत दे दी, लेकिन कहा था कि आदेश 10 दिनों के बाद प्रभावी होगा, क्योंकि सीबीआई ने शीर्ष अदालत में इसे चुनौती देने के लिए समय मांगा था।