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भारत के इस शहर में नहीं चलता धर्म-पैसा और सरकार, रहते हैं 50 देशों के लोग

Sat, 21 Jul 2018 02:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में एक ऐसा शहर भी है जहां रहने वाले लोग न तो कोई धर्म मानते हैं, न ही यहां पैसा चलता है और न ही सरकार। सुनकर थोड़ा ताज्जुब जरूर होगा लेकिन ये सच है। इस शहर का नाम है ऑरोविल, जो चेन्नई से 150 किमी की दूरी पर स्थित है। बता दें इसकी स्थापना 1968 में मीरा अल्फाजों नाम की महिला ने की थी। आज हम आपको इस शहर से जुड़ी कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं।
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रहना होता है सेवक बनकर

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इस शहर को सिटी ऑफ डॉन भी कहा जाता है। यह तमिलनाडु की विल्लुप्पुरम जिले में स्थित है। इस शहर को दुनिया से भेदभाव मिटाने के लिए बनाया गया है। यहां 50 देशों से लोग आकर बसते हैं। शर्त केवल एक ही होती है कि कोई मालिक बनने की कोशिश न करे। यहां सबको सेवक के तौर पर रहना होता है।
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मंदिरों में नहीं होती मूर्ति और तस्वीर

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यहां लोग अपने धर्म से जुड़े भगवानों की पूजा नहीं करते। यहां आपको कोई मूर्ति और तस्वीर भी नहीं मिलेगी। लेकिन यहां एक भव्य मंदिर जरूर है। लोग यहां आकर योग करते हैं। यूनेस्कों ने भी इस शहर की प्रशंसा की थी। यह भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त शहर है। यहां की आबादी 24 हजार के करीब है।

मीरा अल्फाजों ने की थी स्थापना

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इस शहर की स्थापना मीरा अल्फाजों नाम की महिला ने की थी। वह 29 मार्च को पुडुचेरी आई थीं। इसके बाद वह प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जापान चली गई थीं। वह 1920 में दोबारा यहां आईं और 1924 में अरविंदो स्पिरिचुअल संस्थान से जुड़ गईं। भारत में लोग उन्हें मां कहकर पुकारते हैं। उन्होंने 1968 में ऑरोविलो शहर की स्थापना की।
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ऑरोविलो का अर्थ

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इस शहर का नाम ऑरोविलो रखा गया है। जिसका अर्थ है एक ऐसी वैश्विक नगरी जहां कोई भी आकर रह सकता है। यहां सभी देशों के लोग आकर रह सकते हैं। यहां रहने वाले लोग राष्ट्रीयता, जाति, धर्म से ऊपर उठकर रहते हैं। यह सबसे शांत शहर भी माना जाता है।
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