पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद।
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस के खिलाफ एक महिला ने छेड़छाड़ का आरोप लगया है। आरोप सामने आने के एक दिन बाद बोस ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि भविष्य में मेरे ऊपर और भी केस लगने की उम्मीद है। बता दें, पीड़िता एक संविदाकर्मी है, जो राजभवन में काम करती है। पीड़िता के आरोपों को बोस ने बेतुका बताया है।
राज्यपाल बोले- अभी बहुत कुछ होने वाला है
राजभवन ने शुक्रवार को राज्यपाल का एक रिकॉर्ड बयान जारी किया। इसमें तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए राज्यपाल ने कहा कि कोई भी टीएमसी के भ्रष्टाचार और हिंसा पर लगाम लगाने के मेरे प्रयासों को रोक नहीं सकता है। मेरे प्रयास दृढ़ हैं। बयान में उन्होंने आगे कहा कि मैं कुछ राजनीतिक ताकतों द्वारा लगाए गए आरोपों का स्वागत करता हूं। मैं जानता हूं कि अभी और भी बहुत कुछ होने वाला है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि कोई मुझे इन बेतुके आरोपों से नहीं रोक सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा लग रहा है कि मुझे एक दिन 1943 की बंगाल फेमिन के साथ-साथ 1946 में कलकत्ता में हुई हत्याओं के लिए भी दोषी ठहराया जाएगा।
यह है मामला
बता दें, पीड़ित महिला ने गुरुवार शाम हेयर स्ट्रीट थाने में लिखित शिकायत की। उसका दावा है कि राज्यपाल ने उसके साथ दो बार छेड़खानी की। पहली बार 24 अप्रैल को फिर गुरुवार शाम को। महिला का आरोप है कि राज्यपाल ने उसे बायोडाटा के साथ राजभवन स्थित अपने चेंबर में आने को कहा था, जहां उसके साथ छेड़खानी की गई। उसने पहले राजभवन में स्थित आउटपोस्ट में तैनात पुलिसकर्मियों से इसकी शिकायत की। वहां से उसे थाने में जाने को कहा गया। पुलिस की ओर से महिला का परिचय गोपनीय रखा गया है। पता चला है कि महिला 2019 से राजभवन में अस्थायी रूप से कार्यरत है। वह राजभवन परिसर में स्थित हॉस्टल में रहती है।
टीएमसी ने की जांच की मांग
टीएमसी के वरिष्ठ नेता और उद्योग मंत्री शशि पांजा ने मामले में शुक्रवार को कहा कि आरोपों के पीछे पार्टी का कोई एजेंडा और कोई भूमिका नहीं है। घटना चौंकाने वाली है। इस पर विश्वास करना मुश्किल है कि यह राजभवन के अंदर यह सब हुआ। किसी भी राज्यपाल के खिलाफ इससे पहले ऐसे आरोप नहीं लगे हैं। इससे राज्यपाल पद की प्रतिष्ठा कम हुई है। हम निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। बता दें, संविधान की धारा 361 के तहत, किसी भी राज्यपाल के खिलाफ उसके कार्यकाल के दौरान कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती है।