प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा नेताओं से कहा है कि वे चुनाव सुधार को लेकर जनता का मानस बनाएं। देश में लगातार होने वाले चुनावों को विकास का बाधक बताते हुए पीएम मोदी ने कहा है कि पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनाव एक साथ होने चाहिए।
पार्टी नेताओं से उन्होंने इस दिशा में आगे बढ़ने को कहा है। सूत्र बताते हैं कि बीते दिनों संपन्न पार्टी की कार्यसमिति बैठक से पहले भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों से चर्चा में पीएम मोदी ने यह बात कही। बताया जा रहा है कि सरकार के स्तर पर इसके प्रयास जारी है।
संसद के बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में सरकार के मंत्रियों ने अनौपचारिक रूप से सभी राजनीतिक दलों से चर्चा की। जिसमें कांग्रेस समेत सभी दलों के नेताओं ने सुझाव को बेहतर बताया। मगर सरकार को इस बात का भय सता रहा है कि ऐन निर्णय के वक्त पर विपक्ष उन्हें गच्चा दे सकता है।
पीएम मोदी ने इस मसले पर अपने दल के नेताओं से जनता का मानस टटोलने को कहा है। ताकि इस कवायद को आगे बढ़ाया जा सके। पीएम मोदी ने पार्टी नेताओं से कहा कि लगातार चुनाव होने से शासन-प्रशासन पर असर पड़ता है।
वैसे भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आड़वाणी भी वर्ष 2002 में ऐसी सोच जता चुके हैं। हालांकि डा. ईएमएस नचियप्पन के नेतृत्व वाली विधि एवं न्याय मंत्रालय की संसदीय समिति ने भी इस मामले पर गहन मंथन किया है कि जनता के जरिए चुने जाने वाले लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ संपन्न हों।
17 दिसंबर 2015 को राज्यसभा को सौंपे अपने रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने में कई संवैधानिक अड़चने हैं। लेकिन इसे दूर किया जा सकता है। समिति ने कहा है कि यदि देश की जनता को इसके लिए जागरूक किया जाए तो यह संभव हो सकता है।