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दो साल में चार बार, मोदी को क्यों है अमेरिका से इतना प्यार?

Wed, 20 Apr 2016 06:27 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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गत 2, 3 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सऊदी अरब दौरा उनकी 40वीं विदेश यात्रा थी। 2014 की गर्मियों में कमान संभालने के बाद वे 34 मुल्कों की यात्रा कर चुके हैं। संभावना है कि जून में वे चौथी बार अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं। लगभग 22 महीनों के कार्यकाल में चौथा दौरा ये तो बताता है कि अमेरिका से दोस्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे में अव्वल नंबर पर है। 
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वे नेपाल, फ्रांस, रूस और सिंगापुर का दौरा भी दो-दो बार कर चुके हैं। पिछली तीन अमेरिका यात्राओं में उन्होंने दो बार संयुक्त राष्ट्र महासभा के सम्‍मेलन में हिस्सा लिया और मार्च में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से बुलाए गए परमाणु सुरक्षा सम्‍मेलन में शामिल हुए था। सितंबर, 2014 में भी मोदी अमेरिका के राजकीय दौरे पर गए थे। जून में दूसरी बार वे अमेरिका के राजकीय दौरे पर जा रहे हैं। माना जा रहा है आगामी यात्रा में द्विपक्षीय मसलों पर ही चर्चा होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति राजकीय दौरों पर किसी भी राष्ट्राध्यक्ष को आम तौर पर दोस्ताना रुख जाहिर करने के लिए ही आमंत्रित करते हैं। ऐसे दौरों को अमेरिका के साथ किसी मुल्क की नजदीकी का संकेत भी माना जाता है। ओबामा ने 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी राजकीय दौरे पर आमंत्रित किया था।

सवाल यह है कि प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की ऐसे समय में कितनी अहमियत रह जाती है, जब‌कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में है? 
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'लेम डक प्रेस‌िडेंट' ओबामा मोदी को क्या देंगे? 

- फोटो : Reuters
अमेरिकी राष्ट्रपतियों को कार्यकाल के अंतिम दिनों में 'लेम डक प्रेस‌िडेंट' माना जाता है। ओबामा का कार्यकाल अगले साल 20 जनवरी को समाप्त हो जाएगा, जबकि नया राष्‍ट्रपति 8 नवंबर को ही चुन लिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओबामा के रिश्ते पिछले डेढ़ सालों में दो राष्ट्राध्यक्षों से ज्यादा 'दो मित्रों' जैसे रहे हैं। मोदी के निमंत्रण पर ही ओबामा ने पिछले वर्ष गणतंत्र दिवस पर भारत का दौरा किया था। वे पहले ऐसे राष्ट्रपति भी बने, जिन्होंने दूसरी बार भारत का दौरा किया। वे 2010 में यूपीए शासनकाल में भारत आए थे। 

मोदी और ओबामा ने अपनी मित्रता का प्रदर्शन अपने शारीरिक 'हाव-भाव' और 'बातचीत' के जरिए भी किया। दोनों की रिश्तों की गरमाहट संबोधनों में भी दिखी, हालांकि ये गरमाहट दोनों देशों के कारोबार में उस अनुपात में कभी नहीं दिखी। मसलन भारत और अमेरिका के बीच व्यापार की विकास दर की बात करें तो 2013-14 वित्तवर्ष में ये 0.47 प्रतिशत थी, जबकि 2007-08 से 2011-12 के बीच ये 25 फीसदी के ऊपर थी। 

प्रधानमंत्री मोदी के महात्वाकांक्षी कार्यक्रम 'मेक इन इंडिया' के तहत जनरल मोटर्स ही ऐसी बड़ी कंपनी है, जिसने भारत में निवेश का वादा किया है। अमेरिकी ह‌थियार निर्माता कंपनी बीएई सिस्टम्स ने होवित्जर तोपों के असेंब‌लिंग का समझौता भारत की महिंद्रा के साथ किया था। 
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अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ 16 विमान भी बेचे 

- फोटो : Reuters
इसी साल की शुरुआत में अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ 16 लड़ाकू विमान बेचने का फैसला किया ‌था, जबकि भारत इस फैसलों को अपने साम‌रिक हितों के अनुरूप नहीं मानता था। भारत ने अमेरिका के फैसले पर नाराजगी जताई और दिल्ली में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा को तलब भी किया। हालांकि अमेरिका ने भारत के विरोध को खारिज कर दिया। 

दोनों देशों के बीच रिश्तों का संतुलन फिलहाल अमेरिका के पक्ष में अधिक दिख रहा है। हाल ही में अमेरिकी रक्षामंत्री एश्‍टन कार्टर के दौरे में भारत और अमेरिका के बीच लॉजिस्टिक सपोर्ट के समझौते पर सैद्घांतिक सहमति बनी। माना जा रहा है कि अमेरिका इस समझौते के बाद भारत के सैन्य ठिकानों का प्रयोग कर सकेगा। 

फौरी तौर पर इसे भारत को चीन को साधने को कोशिश के रूप में भले ही देखा जाए, लेकिन इसके दीर्घकालिक नुकसान भारत को ही होंगे, ऐसा मानने वालों की भी कमी नहीं है। 
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