केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक बहुत बड़ा जनहित प्रोजेक्ट है। दुनिया के किसी भी देश में ऐसा कार्यक्रम नहीं चलाया जा रहा, जिसमें प्रतिदिन 10 लाख लोगों को भुगतान हो रहा हो।
एटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस एनवी रमन्ना की पीठ को बताया कि राज्यों को इस अधिनियम के तहत पर्याप्त धन मुहैया कराया जा रहा है। याचिकाकर्ता एनजीओ का यह दावा गलत है कि केंद्र की ओर से इस मद में पैसा न मिलने के चलते राज्यों को लोगों को रोजगार देने में दिक्कत हो रही है।
वेणुगोपाल ने कहा, जब भी राज्यों की ओर से इस योजना के तहत अतिरिक्त धन की मांग की जाती है, उन्हें उपलब्ध कराया जाता है। शुरुआत में कुछ प्रक्रिया संबंधी खामियां थीं, लेकिन सरकार के संज्ञान में आने के बाद इन्हें दुरुस्त कर दिया गया।
वहीं एनजीओ स्वराज अभियान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा, इस अधिनियम के तहत दिए जाने वाले रोजगार का भुगतान करने के लिए अपना बजट बढ़ाने की खातिर राज्यों को केंद्र से विनती करनी पड़ती है। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।