ज्योतिरादित्य सिंधिया
सिंधिया का मोदी कैबिनेट का हिस्सा होना लगभग तय है। सिंधिया राजघराने के तीसरी पीढ़ी के नेता हैं और अपने क्षेत्र पर उनकी मजबूत पकड़ है। अपने पिता और कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाने वाले माधवराव सिंधिया के 2001 में निधन के बाद ज्योतिरादित्य राजनीति विरासत में मिली और कांग्रेस ने उन्हें सिर आंखों पर बिठाया। 2002 में हुए उपचुनाव में वे पहली बार अपने पिता के गुना सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
यूपीए सरकार में 2007 में उन्हें मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में केंद्रीय राज्य मंत्री बनने का मौका मिला। 2012 में भी उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया। 2018 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस चुनाव जीती तो उन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था लेकिन पार्टी आलाकमान ने इसके लिए कमलनाथ को चुना और यहीं से सिंधिया के तेवर बदल गए और वे खुद को कांग्रेस में उपेक्षित महसूस करने लगे।
सिंधिया ने यहीं से धीरे-धीरे अपनी अलग राह पकड़ ली और मध्यप्रदेश में अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अपना लिए। जिसका अंत उन्होंने कमलानाथ की सरकार गिरा कर और बहुमत नहीं होने के बावजूद भाजपा की सरकार बना कर किया। मार्च 2020 में उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुए।
भूपेंद्र यादव
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव श्री भूपेन्द्र यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सबसे महत्वपूर्ण सिपहसलारों में से एक हैं। चाहे राज्यसभा में भाजपा को बहुमत नहीं होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर से 370 को रद्द करने वाले ऐतिहासिक विधेयक को सफलता से पारित कराने की बात हो या बिहार में एनडीए को जीत दिलाने का, वे अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वाह करके वे मोदी-शाह के चहेते नेताओं में गिने जाते हैं।यादव राजस्थान से राज्य सभा के सदस्य हैं। पेशे से वकील भूपेंद्र यादव पार्टी महासचिव हैं और बिहार के प्रभारी रहे हैं। कोरोना काल में बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को शानदार जीत दिलाने में उनकी भूमिका अहम रही है। जिससे बीजेपी बिहार में बड़े भाई की भूमिका में आ गई। बताया जाता है कि गुजरात में 6 बार बीजेपी को जीत दिलाने के पीछे भी यादव की ही मेहनत मानी जाती है।
नारायण राणे
शिवसेना से होते हुए भाजपा में पहुंचे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज मराठी नेता नारायण राणे अब मोदी टीम में शामिल होंगे। मराठा समुदाय में राणे की बहुत धमक और धाक मानी जाती है। राणे ने अक्तूबर 2019 में अपनी महाराष्ट्र स्वाभिमान पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया था और वे भाजपा में शामिल हो गए थे. अभी वे राज्यसभा सांसद है। 1 फरवरी 1999 को शिवसेना-बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार में वे मुख्यमंत्री बने. हालांकि वे अक्तूबर 1999 तक ही मुख्यमंत्री के पद तक रहे। शिवसेना से उनके रिश्तों में तब खटास आने लगी जब उद्धव ठाकरे को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की घोषणा की गई।