हर लोकसभा में सांसद बोलने का मौका नहीं मिलने का रोना रोते रहे हैं। इस बार तस्वीर इसके उलट है। इस लोकसभा में पहली बार चुन कर आए 277 सांसदों में से 90 फीसदी सांसदों को पहले ही सत्र में बोलने का मौका मिल चुका है। पहली बार स्पीकर ने शून्यकाल के किसी नोटिस को अस्वीकार नहीं किया है। इसके कारण कार्यवाही और शून्यकाल का समय भी करीब करीब प्रतिदिन बढ़ाना पड़ा है।
कर्मचारियों को खाने के पड़े लाले
देर रात तक कार्यवाही जारी रहने पर इससे सीधे जुड़े कर्मचारियों के लिए खानपान की व्यवस्था रही है। हालांकि गुरुवार को कर्मचारियों को खाने के लाले पड़ गए। कार्यवाही 11 बजे रात तक चली, मगर इनके लिए रात के खाने का कोई इंतजाम नहीं किया गया। देर तक कार्यवाही के कारण ज्यादातर कर्मचारी आधी रात बीतने के बाद घर पहुंचे और शुक्रवार को तड़के नौ बजे ड्यूटी पर हाजिर हुए।