उत्तर भारत के लोग गुजरात से अपने अपने राज्य तो जा रहे हैं। लेकिन उनकी गुजरात से जुड़ी यादें वे शायद कभी भूल नहीं पाएंगे। बता दें कि 28 सितंबर को 14 माह की बच्ची से हुए रेप के बाद गुजराती लोगों के गैर गुजरातियों पर हमले बढ़ गए थे। भीड़ के हमलों से बचने के लिए अब उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार के लोग गुजरात छोड़कर जाने पर मजबूर हैं।
निशाद भी उन्हीं लोगों में से एक हैं। वह लखनऊ के लिए रवाना हुए हैं। निशाद का कहना है, 'मैं अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ वडोदरा में रहता था। हिंसा के शुरू होने के बाद भीड़ में शामिल आदमी पेट्रोलिंग करने लगे और बिहार और यूपी के लोगों को निशाना बनाने लगे। पहले तो मैंने अपने बच्चों को स्कूल जाने से रोका। शनिवार को मेरे फैक्ट्री इंचार्ज ने कहा कि प्रवासियों को चले जाना चाहिए और हालात के सामान्य होने का इंतजार करना चाहिए। मैं अपने घर आया और सामान पैक करके जा रहा हूं।' लखनऊ जाने वाली गाड़ी में बैठे कई लोगों की कुछ ऐसी ही कहानी है।
सोनू कुमार नाम के अन्य व्यक्ति का कहना है, 'मुझे लोगों ने पीटा और पुलिस ने कहा कि वह मजबूर हैं। जो हमारी रक्षा करने के लिए हैं अगर वही हमें भागने को कहें तो यह निराशानजनक है।' वहीं बिहार जा रहे सुरेश साहनी का कहना है कि न तो उनके पास नौकरी है और न सैलरी इसलिए वह पहली गाड़ी से पटना जा रहे हैं। लोग बस, ट्रक और ट्रेन से अपने अपने मूल राज्यों में लौट रहे हैं। माना जा रहा है कि 28 सितंबर को हुई घटना के बाद से अब तक 50 हजार लोग गुजरात छोड़ चुके हैं। बिहार के लोगों ने छट पर जाने के लिए टिकट बुक किए थे लोकिन उन्हें अब पहले ही जाना पड़ रहा है। वो भी वापस न लौटने के लिए।
37 वर्षीय मोहम्मद करीम का कहना है कि उनकी हालत ठीक नहीं है। कुछ लोगों ने उनपर हमला कर दिया था। उनका कहना है कि इससे पहले वह कभी इतना नहीं डरे थे। उन्होंने बताया कि मेहसाना में स्थित फैक्ट्री से वह शनिवार को लौट रहे थे। जहां वह काम करते थे। तभी वहां कुछ लोगों की भीड़ आ गई। जो उनसे पूछने लगी कि वह कहां से आए हैं और उनकी भाषा क्या है।
जब उन्होंने कहा कि वह बिहार से हैं तो भीड़ ने उन्हें घसीटा और कहा कि 12 अक्तूबर से पहले गुजरात छोड़कर चले जाओ। बिहार की एक महिला का कहना है कि गुजरात में उनपर बहुत जुल्म हुआ और उनका सारा सामान भी लूट लिया गया। कुछ लोगों ने तो गुजरात वापस लौटने की उम्मीद ही खो दी है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें लगता है कि गुजरात के हालात सुधरेंगे और वह वापस वहां जा पाएंगे।