खेतों में रखे हुए पंप को ऑफ व ऑन करने के लिए अब किसानों को चिलचिलाती धूप में खेतों में नहीं जाना पड़ेगा। अब किसान मोबाइल से ही खेतों में रखे पंप को अपने हिसाब से चला पाएंगे।
देश में चलने वाले सभी पंपों को स्मार्ट पंप में बदल देने पर सरकार 20,000 करोड़ रुपये तक की बचत कर पाएगी, जो कृषि सब्सिडी के रूप में दी जाती है। सरकार कृषि सब्सिडी के रूप में सालाना 65,000 करोड़ रुपये देती है।
आगामी सात अप्रैल से देश में इस प्रकार के स्मार्ट पंप का वितरण शुरू होने जा रहा है। स्मार्ट पंप के वितरण के काम की शुरुआत बिजली, कोयला, नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल सात अप्रैल को आंध्र प्रदेश से करेंगे।
लेकिन सरकार की तरफ से देश के हर प्रदेश में स्मार्ट पंप का वितरण किया जाएगा। चालू वित्त वर्ष 2016-17 में 10 लाख पंप बांटने का लक्ष्य रखा गया है। स्मार्ट पंप का वितरण ईईएसएल कंपनी के माध्यम से किया जा सकता है।
बिजली मंत्रालय के मुताबिक, स्मार्ट पंप स्कीम के तहत किसानों को सिम वाले कृषि पंप दिए जाएंगे जिसे किसान अपने मोबाइल के जरिए संचालित कर सकेंगे। यह पंप फाइव स्टार रेटिंग का होगा।
इसमें स्मार्ट कंट्रोल पैनल लगा होगा और सिम कार्ड होगा। इस कारण किसान अपने मोबाइल फोन से उसे ऑफ व ऑन करने में सक्षम होंगे। सरकार ने देश में चलने वाले दो करोड़ कृषि पंपों को स्मार्ट पंप से बदलने का लक्ष्य रखा है।
मंत्रालय के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में 10 लाख स्मार्ट पंप बांटने का लक्ष्य है, लेकिन यह संख्या और अधिक भी हो सकती है। स्मार्ट पंप से वर्ष 2019 तक 30 फीसदी तक बिजली की बचत होगी।
मंत्रालय का मानना है कि पुराने कृषि पंप में बिजली की काफी खपत होती है। वहीं डीजल से चलाने पर किसानों को काफी खर्च करना पड़ता है। अगले 3-4 सालों में देश के सभी पुराने कृषि पंपों को स्मार्ट पंप में बदलने की योजना है।
अभी कृषि पंपों को चलाने में 170 अरब यूनिट बिजली की खपत होती है। राज्यों में अब खेतों में बिजली की आपूर्ति के लिए अलग फीडर लगाए जा रहे हैं। राज्यों की सरकार किसानों को कम दर पर या मुफ्त में बिजली उपलब्ध कराती है। ऐसे में बिजली की कम खपत होने पर उनकी सब्सिडी राशि की बचत होगी।