मिजोरम में भारतीय जनता पार्टी के इकलौते विधायक बुद्ध धान चकमा के साथ ही 12 अन्य नेताओं को भ्रष्टाचार के एक मामले में एक साल की जेल की सजा सुनाई गई है। विशेष न्यायाधीश वनलालेनमाविया ने तुइचांग के विधायक समेत 13 लोगों को 2013 से 2018 के बीच चकमा स्वायत्त जिला परिषद (सीएडीसी) के 1.37 करोड़ रुपये के गबन के लिए एक साल की जेल की सजा सुनाई।
अदालत ने उन्हें 22 जुलाई को विकास कार्यों के लिए रखी विशेष सहायता निधि से पैसे निकालने और अपनी आधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग करने का दोषी ठहराया था। जब यह भ्रष्टाचार हुआ तो ये सभी सीएडीसी के सदस्य थे। अदालत ने उन पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना राशि न देने पर उन्हें 30 अतिरिक्त दिन की सजा काटनी होगी।
अदालत ने सुनवाई के तुरंत बाद ही दोषियों को जमानत पर रिहा कर दिया। उनके वकील ने याचिका दी थी कि वे इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।
फार्महाउस पर वेश्यालय चलाने का आरोपी भाजपा नेता फरार
वहीं, मेघालय के तुरा में अपने फार्महाउस पर वेश्यालय चलाने के आरोपी भाजपा के मेघालय उपाध्यक्ष बर्नार्ड एन मराक की गिरफ्तारी के लिए सोमवार को गैर जमानती वारंट जारी किया गया। शनिवार को छापेमारी में छह नाबालिगों को छुड़ाए जाने और उनके फार्महाउस रिंपू बागान से 73 लोगों को गिरफ्तार करने के बाद मराक फरार है। वेस्ट गारो हिल्स के पुलिस अधीक्षक विवेकानंद सिंह ने कहा कि बर्नार्ड एन मराक उर्फ रिंपू के खिलाफ गिरफ्तारी का गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है। तुरा में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा स्थायी वारंट जारी किया गया है।
पुलिस ने कहा कि मराक को जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया था, लेकिन वह जांचकर्ताओं से बच रहा है। उन्होंने बताया कि उसे पकड़ने के लिए तलाश की जा रही है। आतंकवादी से नेता बने मराक ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा द्वारा राजनीतिक प्रतिशोध का निशाना बने और उन्हें अपनी जान का डर है। इस आरोप को खारिज करते हुए उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसोंग ने कहा कि उनकी सरकार पुलिस को पूरी आजादी से काम करने की अनुमति देती है।
पूर्वोत्तर गैस सिलेंडर ट्रांसपोर्टर संघ ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
पूर्वोत्तर भारत के एलपीजी ट्रांसपोर्टर संघ नेपल्टा ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) की तरफ से मंगाई गई नयी निविदा में कम दरें रखे जाने और अन्य मुद्दों को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। पूर्वोत्तर में एलपीजी बॉटलिंग संयंत्र से वितरकों तक सिलेंडरों का परिवहन करने वाले ट्रांसपोर्टरों के संगठन नेपल्टा के अध्यक्ष निरंजन महंत ने कहा कि आईओसी की तरफ से मंगाई गई नई निविदा में वर्ष 2011 से भी कम दरों पर बोली लगाने को कहा गया है।
उन्होंने कहा, पिछले 11 साल में मुद्रास्फीति के काफी बढ़ जाने के बाद ऐसा कर पाना हमारे लिए कैसे संभव है? सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी आईओसी ने वर्ष 2015 में परिवहन अनुबंधों को नवीनीकृत किया था लेकिन उसकी दरें 2011 के समान ही थीं। महंत ने दावा किया कि इस सात साल पुरानी निविदा शर्तों के ही अनुरूप सभी वाहन संचालित हो रहे थे। महंत ने कहा, अब आईओसी की तरफ से जो नई निविदा मंगाई गई है उसमें हमसे 2011 की दरों से भी पांच फीसदी कम दर पर बोली लगाने को कहा गया है। इसके अलावा हमारे पिछले बकाये का भी अभी तक भुगतान नहीं किया गया है।