पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में अबकी सत्ता की दावेदारी समझे जाने वाले विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों में शराबबंदी को मुद्दा बनाने का फैसला किया है। पार्टी ने कहा है कि चुनाव जीत कर सत्ता में आने के बाद वह मिजोरम में एक बार फिर शराबबंदी लागू कर देगी। छह क्षेत्रीय दलों के गठबंधन जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) ने भी शराबबंदी दोबारा लागू करने की बात कही है।
ध्यान रहे कि 17 साल की शराबबंदी के बाद ललथनहवला की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2014 में शराबबंदी खत्म कर दी थी। हालांकि शराब की बिक्री और सेवन पर यहां कई तरह की पाबंदियां लागू हैं। राज्य में फिलहाल शराब की 30 दुकानें और दो बार हैं। शराब की खरीद के लिए सरकार की ओर से एक कार्ड जारी किया जाता है।
इसी आधार पर 21 साल से ज्यादा उम्र के लोग हर महीने अधिकतम छह बोतल शराब और 12 बोतल बीयर खरीद सकते हैं। इस कार्ड के लिए लोगों को पंजीकरण शुल्क के तौर पर पांच सौ रुपए देने होते हैं और हर साल इसके नवीनीकरण पर तीन सौ रुपए खर्च करना होता है।
एमएनएफ प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री जोरमथांगा कहते हैं कि पार्टी पूर्ण शराबबंदी के पक्ष में है। अगर अगले महीने होने वाले चुनाव में जीत कर हमारी सरकार बनी तो राज्य में दोबारा पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शराबबंदी खत्म कर शराब की बिक्री के जरिए अपनी जेब भर रही है। सरकार के इस फैसले से हर साल सैकड़ों लोग असमय ही मौत के मुंह में समा जाते हैं।
जोरमथांगा का दावा है कि चर्च के अलावा राज्य के स्थानीय लोग भी शराबबंदी के समर्थन में हैं। उन्होंने शराब की सप्लाई और बिक्री के लिए खेल मंत्री जोडिंत्लुआंगा पर निशाना साधा है। उनके पिता शराब का धंधा करते हैं। लेकिन मंत्री ने यह कहते हुए इन आरोपों को खारिज कर दिया है कि पिता के धंधे से उनका कोई लेना-देना नहीं है और वे अलग घर में रहते हैं।
राज्य के प्रमुख सामाजिक संगठन यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) ने भी कहा है कि वह शराबबंदी की मांग जारी रखेगी। वाईएमए अध्यक्ष वानलालरुआता कहते हैं कि राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की जाना चाहिए। शराब की वजह से हर साल सैकड़ों युवा मर रहे हैं।