असम में रहने वाले लगभग नौ हजार ऐसे लोगों ने माध्यमिक यानी 10वीं की परीक्षा के डुप्लीकेट एडमिट कार्ड के लिए आवेदन किया है जिन्होंने वर्ष 1973 से पहले पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन द्वारा आयोजित परीक्षा में हिस्सा लिया था। बोर्ड के अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली ने यहां बुधवार को यह जानकारी दी।
ऐसे एडमिट कार्ड को एक अहम दस्तावेज माना जाता है क्योंकि इस पर परीक्षार्थी की जन्मतिथि लिखी होती है। उन्होंने बताया कि राज्य शिक्षा विभाग ने जुलाई के बाद इन तमाम आवेदनों को बोर्ड के पास भेजा है। गांगुली ने बताया कि बोर्ड ने अब तक 6000 लोगों के एडमिट कार्ड जारी कर संबंधित व्यक्तियों को भेजा है। ये लोग मूल रूप से त्रिपुरा के रहने वाले थे और बाद में असम चले गए थे। उन्होंने वर्ष 1973 से पहले बोर्ड की ओर से आयोजित माध्यमिक की परीक्षा पास की थी। बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि शेष आवेदनों की जांच का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं बता सकता कि असम में नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस (एनआरसी) के अंतिम मसौदे से बाहर किए गए बंगालियों के नामों से हजारों की तादाद में मिलने वाले इन आवेदनों का कोई संबंध है या नहीं। यह भी हो सकता है कि इन लोगों के मूल दस्तावेज खो गए हों।
वहीं जानकारों का कहना है कि 40 से 45 साल बाद अचानक आने वाले हजारों आवेदनों का एनआरसी से सीधा संबंध है। वर्ष 1973 से पहले बंगाल से 10वीं की परीक्षा में शामिल होने का दस्तावेज उनकी नागरिकता साबित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। असम में एनआरसी के अंतिम मसौदे से जिन लोगों के नाम छूट गए हैं वे जरूरी दस्तावेजों के साथ दोबारा आवेदन कर सकते हैं। बीती जुलाई में जारी उक्त मसौदे में कम से कम 40 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं थे।