केरल के वेल्लूर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) ने कोविड की रोकथाम के लिए मिक्स बूस्टर डोजर का परीक्षण पूरा कर लिया है। वह जल्दी ही अपनी अध्ययन रिपोर्ट केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को सौंप देगा। इसके बाद दवा नियामक मिक्स बूस्टर डोज देने की इजाजत दे सकता है। इससे टीकों के असर में इजाफा हो सकता है।
इसके बाद एक समान कोविड रोधी टीकों (homologous) या विषम कोविड रोधी टीकों (heterologous) को मिलाकर तैयार की जाने वाली मिश्रित बूस्टर खुराक को इजाजत देने पर विचार होगा। वेल्लूर के इस कॉलेज को पिछले साल राष्ट्रीय दवा नियामक ने मिक्स बूस्टर डोज के परीक्षण की इजाजत दी थी। सीएमसी वेल्लूर ने अपना अध्ययन पूरा कर लिया है। वह अब अध्ययन के डाटा तैयार कर रहा है। इसके दो सप्ताह में सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन अध्ययन रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।
वरिष्ठ वैक्सीन विशेषज्ञ गगनदीप कांग के नेतृत्व में सीएमसी ने यह अध्ययन किया। उनका कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की स्क्रीनिंग कमेटी ने नमूनों का परीक्षण करने के लिए गत सप्ताह अनुमति दी थी। डॉ. कांग स्वयं इस कॉलेज की फैकल्टी हैं। सीएमसी की अध्ययन रिपोर्ट की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार मिक्स बूस्टर खुराक को इजाजत देने पर अंतिम फैसला लेगी।
अध्ययन के आरंभिक नतीजों से टीकाकरण संबंधी राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) को पहले ही अवगत कराया जा चुका है। इस समूह ने अध्ययन करने वाली टीम से कुछ और डाटा मांगे थे, ताकि मिक्स बूस्टर खुराक के एंटीबॉडीज पर होने वाले प्रभावों का आकलन किया जा सके। अब मिक्स खुराक के एंटीबॉडी के विकास व स्पाइक प्रोटीन पर असर का आकलन किया जाएगा।
दरअसल, दो समान टीकों या असमान टीकों को मिलाकर तैयार की जाने वाली खुराक का ज्यादा असर पाया गया है। इसलिए सीएमसी वेल्लूर के परीक्षण के भी नतीजे अच्छे आने की उम्मीद है। ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन में पाया गया है मिक्स बूस्टर खुराक से शरीर में ज्यादा एंटीबॉडी का निर्माण हुआ और यह कोरोना से बचाव में ज्यादा कारगर है। लेंसेट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन में किए गए अध्ययन में 2878 लोगों पर ट्रायल किया गया। इन लोगों को मिक्स डोज दी गई थी। इसके बाद उनमें ज्यादा एंटीबॉडी मिली।