पर्यटन मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट में योगा और वैलनेस सेंटर के माध्यम से किए जाने वाले भारतीय पुरातन चिकित्सा व्यवस्था का भी समावेश है। आयुष मंत्रालय के माध्यम से लगातार इस विधा को न सिर्फ प्रमोट किया जा रहा है बल्कि देश दुनिया में इसे प्रचारित और प्रसारित भी किया जा रहा है। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक आयुष मंत्रालय के इन प्रयासों का असर मेडिकल और वैलनेस टूरिज्म के तौर पर भी बेहतर रूप से दिखेगा।
मेडिकल और वैलनेस टूरिज्म के अलावा पर्यटन मंत्रालय ने देश में रूरल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी नए स्तर पर प्रयास शुरू किए हैं। मंत्रालय के मुताबिक देश के बहुत सारे राज्यों में अभी भी सालभर ग्रामीण पर्यटन होता रहता है, लेकिन कोरोना काल में यह बहुत हद तक कम हो गया। अब रूरल टूरिज्म के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इसे बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों ने अपने तैयार किए गए ड्राफ्ट में रूरल टूरिज्म को आगे बढ़ाने के लिए पूरी योजना तैयार की है।
अधिकारियों के मुताबिक वोकल फॉर लोकल जैसी व्यवस्थाएं ग्रामीण स्तर पर पर्यटन को न सिर्फ आगे ले जाएंगी बल्कि आर्थिक तौर पर भी मजबूती प्रदान करेंगी। रूरल टूरिज्म के लिए तैयार किए गए नेशनल ड्राफ्ट में न सिर्फ नॉर्थ ईस्ट के गांव बल्कि देश के उन राज्यों के अनछुए गांव और उनकी कहानियों के बारे में भी पूरी ड्राफ्टिंग की है। जिसको केंद्रीय मंत्रालय अपनी वेबसाइट के माध्यम से पूरी दुनिया में लोगों को अपने देश में आने का न्योता देगा।
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने उद्योग को बढ़ावा देने के लिए आम लोगों से भी राय ली है। 30 जून तक देश के लाखों लोगों ने अपने फीडबैक के माध्यम से रूरल टूरिज्म और मेडिकल एंड वैलनेस टूरिज्म को आगे ले जाने के लिए तमाम सुझाव भी दिए हैं। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक लोगों को दिए गए सुझाव के आधार पर ही नेशनल ड्राफ्ट तैयार किया, जिससे अब मंदी की मार सह रहे इस उद्योग को नई रफ्तार मिल सकेगी।