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कोरोना से बचने के आयुर्वेदिक उपायों की जल्द घोषणा करेगा आयुष मंत्रालय

Thu, 23 Apr 2020 04:31 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आयुर्वेद के उपायों की वैज्ञानिक वैधता देने के लिए आईसीएमआर के मानदंडों पर खरा उतरने की कोशिश जारी
  • पचास अस्पतालों में होगा परीक्षण, दो माह का लग सकता है समय
  • वैज्ञानिक परीक्षणों पर खरा उतरकर पश्चिमी देशों में स्वीकार्य होने की कोशिश
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Ayurveda Coronavirus - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कोरोना के इलाज की दवा अभी विकसित नहीं हो पाई है, लेकिन विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि जिन लोगों की रोग प्रतिरोधी क्षमता अच्छी होती है, वे कोरोना की गिरफ्त में कम आते हैं। ऐसे लोग संक्रमण की चपेट में आ जाने के बाद भी अच्छे ढंग से स्वास्थ्य लाभ करते हैं।

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इसे देखते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष के उपायों के जरिए लोगों की रोग प्रतिरोधी क्षमता (Immunity) बढ़ाने पर जोर दिया था। आयुष मंत्रालय की एक 'टास्क फोर्स' ऐसे विशेष उपायों पर काम कर रही है जो कोरोना जैसे संक्रामक रोगों से लोगों को बचाने में कारगर साबित हो सकता है।

टीम ने कुछ उपायों का चुनाव भी कर लिया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की सहमति के बाद जल्दी ही इसे जनता के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।

आयुष मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री की अपील के बाद एक टास्क फोर्स का गठन किया गया था। इसमें टीम में आयुर्वेद के वरिष्ठ जानकारों के अलावा यूनानी और नेचुरोपैथी के वैज्ञानिकों को भी शामिल किया गया था।

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इस टीम ने कुछ उपायों को अपनाकर संक्रमण से बचने का नुस्खा सुझाया है।  यह तरीका पूरी तरह वैज्ञानिक और सभी लोगों के द्वारा स्वीकार्य हो, इसके लिए इनका वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है। अंततः आईसीएमआर से प्रमाणपत्र मिल जाने के बाद इसे लोगों के सामने पेश किया जा सकता है। इसमें दो माह का समय लग सकता है।

जानकारी के मुताबिक, आयुष मंत्रालय के उपाय कोरोना की बीमारी के पूर्ण इलाज करने का दावा नहीं करेंगे। ये केवल सहयोगी प्रकृति के हो सकते हैं। यानी इनके लेने से संक्रमण न हो, और अगर संक्रमण हो गया है तो इलाज के दौरान स्वास्थ्य लाभ लेने में तेजी आ सके।  

परीक्षण के लिए सहयोग दे रहा आयुष मंत्रालय

पश्चिमी देशों का पूरा समुदाय उन्हीं तरीकों पर विश्वास करता है जो उपाय क्लीनिकल परीक्षणों पर खरे उतरते हैं। इसे देखते हुए आयुष मंत्रालय अपने उपायों को मरीजों पर परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए पूरे देश में पचास केंद्रों का चयन किया जाएगा। 

जो अस्पताल अपने मरीजों पर आयुर्वेद के उपायों का परीक्षण करेंगे, आयुष मंत्रालय उन्हें दस लाख रुपये (प्रत्येक को) की आर्थिक मदद भी उपलब्ध कराएगा। आयुष मंत्रालय ने परीक्षणों के लिए कुछ विशेषज्ञों की सेवाएं लेने का भी निर्णय किया है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

ये है बड़ी चुनौती

सेंट्रल काउंसिल ऑफ रिसर्च इन नेचुरोपैथी एंड योगा के निदेशक डॉक्टर राघवेंद्र राव ने अमर उजाला को बताया कि पश्चिम के स्टैंडर्ड पर खरे उतरना आयुर्वेद या प्राकृतिक चिकित्सा के उपायों के लिए कठिन चुनौती है।

भारत में इन उपायों को पारंपरिक तौर पर अपनाया जाता रहा है, लेकिन पश्चिम हर परिणाम को तथ्यात्मक परिमाण से परखने की कोशिश करता है। यही कारण है कि कोरोना काल में भारतीय आयुर्वेद या प्राकृतिक चिकित्सा को पश्चिम में लोकप्रिय बनाने के लिए हमें और अधिक मानक परीक्षण करने होंगे।

इसके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्दी ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

डॉक्टर राघवेंद्र राव के मुताबिक भारत में कोरोना के अलग-अलग क्षेत्रों में सामने आए मामलों में 6 फीसदी से लेकर 69 फीसदी तक लोगों में संक्रमण के लक्षण दिखाई नहीं पड़े हैं। यह इसी बात का प्रमाण हो सकता है कि भारतीय समाज में लोग अपने भोज्य पदार्थों में जड़ी-बूटियों का बखूबी इस्तेमाल करते हैं।

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इससे इस बात को बल मिलता है कि अगर इन तरीकों को सही तरीके से अपनाया जाए तो किसी भी संक्रामक रोगों की चपेट में आने से बचा जा सकता है।

 

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