मंत्री ने चीन के साथ भारत की बातचीत को जटिल बताते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों पक्ष अपने मतभेद कम करने पर तथा किसी भी मुद्दे पर मतभेद को विवाद न बनने देने के लिए सहमत हुए हैं।
उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि उनके संबंधों की भावी दिशा एक दूसरे की विकास संबंधी महत्वाकांक्षाओं के लिए परस्पर सम्मान को ध्यान में रख कर तैयार की जानी चाहिए।
पूर्वी लद्दाख में गतिरोध को लेकर उन्होंने कहा पिछले कुछ माह में हमने कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से चीनी पक्ष के साथ बातचीत की है ताकि संघर्ष के सभी बिंदुओं से सैनिकों की वापसी एवं भारत-चीन सीमा इलाकों पर शांति सुनिश्चित हो सके।
मुरलीधरन ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की उनके चीनी समकक्ष वांग यी के साथ मास्को में 10 सितंबर को हुई बातचीत का भी संदर्भ दिया । उनके अनुसार, दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि सीमा क्षेत्रों में वर्तमान स्थिति किसी भी पक्ष के हित में नहीं है।
उन्होंने कहा ‘‘इसके बाद दोनों नेता इस बात पर भी सहमत हुए कि दोनों पक्षों के सीमा सैनिकों को बातचीत जारी रखनी चाहिए, सैनिकों की शीघ्र वापसी होनी चाहिए, समुचित दूरी बनाए रखना चाहिए और तनाव घटाना चाहिए।’’
मुरलीधरन ने बताया कि दोनों पक्षों ने भारत चीन सीमा मामलों पर विचार-विमर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र की छह बैठकें की हैं और वरिष्ठ कमांडरों की नौ बैठकें हुई हैं।