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चिंताजनक: इंसानों की तरह बीमार पड़ रहीं दुनिया की लाखों झीलें,भारत की 3043 झीलों पर खतरा

Tue, 30 Apr 2024 07:26 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

दुनियाभर में 10 हेक्टेयर से बड़ी 5.9 फीसदी झीलें ऐसी हैं जो शैवालों के बढ़ने का जोखिम झेल रही हैं। इनमें 3,043 भारत में हैं। धरती पर 14 लाख से अधिक झीलें ऐसी हैं जो आकार में 10 हेक्टेयर या उससे ज्यादा बड़ी हैं।
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श्रीनगर, डल झील का नजारा - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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दुनियाभर में 10 हेक्टेयर से बड़ी 5.9 फीसदी झीलें ऐसी हैं जो शैवालों के बढ़ने का जोखिम झेल रही हैं। इनमें 3,043 भारत में हैं। धरती पर 14 लाख से अधिक झीलें ऐसी हैं जो आकार में 10 हेक्टेयर या उससे ज्यादा बड़ी हैं। ये झीलें इंसानों की तरह सेहत संबंधित समस्याओं से जूझ रही हैं और बीमार पड़ रही हैं।

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जर्नल अर्थ फ्यूचर में इनके स्वास्थ्य को लेकर प्रकाशित एक शोध में कहा है कि इन समस्याओं को रोकने और इलाज के लिए हमें मानव स्वास्थ्य देखभाल में उपयोग की जाने वाली रणनीतियों की आवश्यकता है। इनमें समस्याएं उत्पन्न होने से पहले कार्रवाई करना, नियमित जांच करना और स्थानीय से लेकर वैश्विक स्तर तक उचित पैमाने पर समाधान लागू करना शामिल है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, दुनिया की 12 फीसदी से अधिक आबादी इन झीलों के तीन किमी के दायरे में बसी है। ये झीलें न केवल पानी की जरूरतों को पूरा करती हैं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र संबंधी आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। झीलें भी इन्सानों की तरह ही जीवित प्रणालियां हैं। इन्हें ऑक्सीजन, साफ पानी और संतुलित ऊर्जा के साथ-साथ पोषक तत्वों की आवश्यकता है। ऐसा न होने पर इनमें सांस और प्रवाह से जुड़ी समस्याएं, पोषक तत्वों में असंतुलन, तापमान, विषाक्तता और संक्रमण जैसी दिक्कतें आ रही हैं। 

14 लाख से ज्यादा झीलों का विश्लेषण
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लेकएटलस नामक डाटाबेस का उपयोग किया है। इसमें से उन्होंने 14,27,688 झीलों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। अध्ययन के अनुसार, जहां झीलों के आसपास की 75 फीसदी से अधिक जमीन का उपयोग खेती के लिए किया जा रहा है, वहां झीलों में बढ़ते पोषक तत्वों की वजह से हानिकारक शैवालों के बढ़ने का जोखिम बेहद ज्यादा है।
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सिकुड़ रही कश्मीर घाटी की झीलें
रिपोर्ट के अनुसार जहां डल झील के आकार में 25 फीसदी तक की गिरावट आई है। वहीं, वुलर झील का जल क्षेत्र भी एक चौथाई सिकुड़ गया। कश्मीर घाटी में मौजूद झीलें पिछले कुछ वर्षों में तेजी से सिकुड़ रहीं हैं। साथ ही इन झीलों में मौजूद पानी की गुणवत्ता भी तेजी से गिर रही है। यह जानकारी नासा अर्थ ऑब्जर्वेटरी की ओर से साझा की गई रिपोर्ट में सामने आई है।

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