कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन में उद्योग-धंधे ठप हुए तो प्रवासी श्रमिकों ने पलायन कर दिया। लेकिन लॉकडाउन के नियमों में ढील के बाद जैसे-जैसे राज्य में उद्योग धंधे शुरू हो रहे हैं प्रवासी मजदूरों की वापसी का सिलसिला भी शुरू हो गया है। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने बताया कि अभी सीमित संख्या में ही रेल गाड़ियां चल रही हैं फिर भी हर दिन करीब साढे 15 हजार प्रवासी मजदूर वापस आ रहे हैं।
गृहमंत्री देशमुख ने बताया कि मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई जैसे शहरों में रोजाना करीब 11 हजार प्रवासी मजदूर वापस लौट रहे हैं, जबकि नागपुर गोंदिया नंदुरबार कोल्हापुर और पुणे जैसे शहरों में कुल मिलाकर रोजाना औसतन 4 से 5 हजार प्रवासी मजदूरों की वापसी हो रही है। देशमुख ने कहा कि वापस आ रहे प्रवासी मजदूरों की सूची पहले संबंधित राज्यों से महाराष्ट्र सरकार को भेजी जाती है, जिसके बाद उनका रजिस्ट्रेशन किया जाता है और वापसी आने की इजाजत दी जाती है।
जुलाई तक लौट आएंगे 13 लाख मजदूर
महाराष्ट्र सरकार के प्रधान सचिव (समाजिक न्याय) पराग जैनुटिया का कहना है कि अब तक एक लाख मजदूर वापस लौट चुके हैं और जुलाई तक 13 लाख प्रवासी मजदूर वापस आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में कामकाज ठप होने के बाद अप्रैल और मई में 21 राज्यों के लिए चली 844 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से 12 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर अपने गांव गए, इनमें से 6.40 लाख प्रवासी उत्तर प्रदेश और 2.80 लाख मजदूर बिहार के थे।
शेष झारखंड,पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मजदूर थे। ट्रेन के अलावा भारी संख्या में मजदूर बसों, ट्रक, टैंपो, रिक्शा और पैदल अपने गृह राज्यों की तरफ पालयन किये थे। जिनकी संख्या 30 लाख से अधिक है।